हिंदू कोड-जारी - Page 590

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डी. फैक्टो (विधितः) हिंदू हैं- यह हिंदू कानून के वे भाग हैं जो उन्होंने अपना लिए हैं, उन्हें ही उन पर लागू माना जायेगा न कि पूर्ण अधिनियम को। परिणामस्वरूप, उन समुदायों के सदस्यों के मन में इससे डरने की आवश्यकता नहीं है जिनकी भी आदिम परिस्थितियाँ हैं और जो विवाह व तलाक की अपनी-अपनी विभिन्न राहों और प्रक्रियाओं तथा कानूनों का अनुगमन करते हैं उनकी अभी भी सुरक्षा की जायेगी बशर्तें कि यदि यह प्रमाणित हो जाता है कि उन्होंने हिंदू कानून का कोई भी भाग अपना लिया है, यह केवल उसी सीमा तक है जब उन्हें इस संहिता द्वारा शासित किया जा रहा हो, अन्यथा नहीं। मेरा निवेदन है कि हमने उप-धारा 2 में प्रतिबंध को जोड़ कर प्रत्येक पूर्वोपाय कर लिया है। पूरे हिंदू कानून पर लागू न करें जो उन पर भाग II में लागू किया जायेगा।

उन्हें इस प्रतिबंध में की गई व्यवस्था की सीमा तक के अतिरिक्त तब भी उनको अपने मार्ग में जाने की स्वतंत्रता होगी।

एक अन्य विषय, जिसका उल्लेख करते हुए मैं आगे बढ़ना चाहता हूँ, जिसे मेरे मित्र डॉ. पाण्डे और मेरे मित्र श्री टी.एन. सिंह ने उठाया है। उन्होंने कहा था, मैं प्रायः असंदिग्ध निबंधनों में विश्वास रखता हूँ जैसे कि उन रीति-रिवाजों को, जो आज विद्यमान हैं, सुरक्षित रखना चाहिए और उन्हें बंद करने के लिए कुछ भी नहीं किया जाना चाहिए। मेरे मित्र, डॉ. पाण्डे, मेरा विश्वास है, एक नौजवान स्नातक हैं; मैं उन्हें नासमझ नहीं कहना चाहता हूँ परन्तु विश्वविद्यालय के एक नौजवान स्नातक ने संभवतः अब तक यह अध्ययन तो कर लिया होगा कि संसद भवन का अर्थ क्या है....

एक माननीय सदस्य : वे एक प्राध्यापक और एक सचिव हैं।

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डा. अम्बेडकर : मैं बहुत शर्मिंदा हूँ, परन्तु वे अभी भी कुछ पहलुओं से अनभिज्ञ

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हैं। देश में लोग रीति-रिवाजों के विषय में बात करते हैं। अच्छा, रीति-रिवाज क्यों पनपे हैं? स्मृतिकारों ने रिवाजों को क्यों चलते रहने दिया? मेरा विचार है इस प्रश्न का उत्तर इस तथ्य से पाया जा सकता है कि जहाँ तक इस देश का संबंध है यहाँ पर लोगों के प्रतिनिधियों वाली संसद जैसी कोई बात ही नहीं थी जो यहाँ आकर अपने सामाजिक संबंधों के अनुसार विधान निश्चित करते हैं; इस प्रकार की पहले ऐसी कोई चीज ही नहीं थी। (रुकावट) मैं नहीं जानता हूँ कि क्या हम बेहतर हैं अथवा नहीं है। इस देश में लोगों के जीवन को रीति-रिवाजों द्वारा शासित किए जाने की अनुमति क्यों दे दी गई है। और इस प्रकार के अत्यधिक कठिन रूप में दी गई है कि दुनिया के किसी भी अन्य भाग में नहीं पाई जाती है, इसका कारण और आधारभूत कारण....