हिंदू कोड-जारी - Page 592

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आवश्यक एवं उपयोगी साधन को जीवन की धारा बदलने के लिए, जिसके लिए ही उसे बनाया गया है, अनवरत चलने देना चाहिए, यदि ऐसी व्यवस्था को जिसे मैसर्स पाण्डे और टी. एन. सिंह द्वारा समर्थन दिया गया हो, स्वीकार किया गया, कि संसद को रिवाजी कानूनों के संबंध में कोई भी न्यायाधिकार नहीं लेना चाहिए....

माननीय उपाध्यक्ष : क्या माननीय कानून मंत्री अधिक समय लेंगे?

डॉ. अम्बेडकर : मैं बस समाप्त ही कर रहा हूँ।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : हमारे सभी विषय माननीय कानून मंत्री द्वारा नहीं उठाए गए हैं। उन संशोधनों का क्या होगा जिन्हें हमने प्रस्तुत किया है? क्या वे निकाल दिए जायेंगे....

श्री टी.एन. सिंह : वैयक्तिक स्पष्टीकरण के विषय पर, माननीय कानून मंत्री कहते हैं कि मेरी प्रार्थना है कि प्रत्येक रीति-रिवाजों का निष्ठापूर्वक निरीक्षण करना चाहिए। मेरा विचार है कि संभवतः वे मेरी हिंदी नहीं समझ सके हैं....

डॉ. अम्बेडकर : इसकी पूरी संभावना है।

श्री टी.एन. सिंह : मेरा कहना था कि सभी रीति-रिवाजों को एक कानून द्वारा सरलता से नहीं समाप्त किया जाना चाहिए। मैं चाहता हूँ कि....

डॉ अम्बेडकर : इस बात से सहमत हूँ।

श्री टी.एन. सिंह : मैं पूछना चाहता हूँ कि माननीय कानून मंत्री के पास देश में प्रचलित रीति-रिवाजों की क्या कोई विस्तृत सूची होगी। देश के सभी रीति-रिवाजों को जाने बिना यह कह देना कि सभी रिवाज लागू नहीं किए जाने चाहिए, उचित नहीं है। मेरा निश्चित रूप से कहना यही था।

डॉ. सी.डी. पाण्डे : एक बात कही गई है, श्रीमान्....

डॉ. अम्बेडकर : आप मेरे कक्ष में आकर कहें।

डॉ. सी.डी. पाण्डे : डॉ. अम्बेडकर ने इसे संसद में कहा था और मैं चाहता हूँ इसे संसद में ही स्पष्ट कर देना चाहिए। मैंने यह नहीं कहा था कि संसद को रिवाजी बातों के लिए कानून बनाने के लिए कोई अधिकार नहीं थे। संसद से मेरी प्रार्थना है कि संसद को उनके कानून नहीं छूने चाहिए। या उससे पूर्णतः अलग स्थिति है जिसे कानून मंत्री ने ऐसा बना दिया है।

माननीय उपाध्यक्ष : मैं धारा और संशोधनों को इसी क्रमानुसार प्रस्तुत करूँगा।