580 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
* हिंदू संहिताः जारी
धारा 4-(संहिता का अध्यारोही प्रभाव)
* कानून मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : महोदय क्या मैं निवेदन कर सकता हूँ कि हिंदू संहिता की धारा 4 से संबंधित प्रस्ताव, जो निर्धारित किया जाना था, उसे पहले प्रस्तुत करने की कृपा करें तत्पश्चात् ही अन्य कार्य-व्यापार लेने चाहिए।
माननीय उपाध्यक्ष : माननीय मंत्री इस विधेयक को इसके उस भाग की तुलना में वरीयता देना चाहते हैं। पिछले दिन इस धारा पर वार्तालाप और प्रत्युत्तर समाप्त हो गए थे परन्तु जैसे ही मैं सदन में इस संशोधन को प्रस्तुत करने ही वाला था तभी सदन के माननीय सदस्यों ने कह दिया कि पहले ही 1.15 का समय हो चुका है ओर इसमें तो बहुत अधिक समय लगेगा। हमें फिर सदन को स्थगित कर देना पड़ा। अब हम इसे पूरा समाप्त करेंगे।
अब मैं पण्डित ठाकुर दास भार्गव का संशोधन प्रस्तुत करूँगा।
प्रश्न है :
कि धारा 4 के लिए, निम्नलिखित का प्रतिस्थापन किया जाए :
‘‘4. इस संहिता के लागू होने के तत्काल पूर्व हिंदू कानून के किसी भी शास्त्र-नियम अथवा निर्वचन अथवा किसी भी रिवाजी प्रथा का वर्चस्व इस संहिता से असंबंधित मामलों में बना रहेगा’’। प्रस्ताव खारिज हुआ।
माननीय उपाध्यक्ष : अब हम संशोधन संख्या 44 पर आते हैं।
पंडित ठाकुर दास भार्गव (पंजाब) : मैं इसे वापिस लेने का निवेदन करता हूँ। संशोधन, इजाजत लेकर, वापिस ले लिया गया। माननीय उपाध्यक्ष : प्रश्न हैः
कि माननीय डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन में, प्रस्तावित धारा 4 के भाग (क) में, ‘‘किसी भी रिवाज या प्रथा’’ शब्द को हटा दिया जाए।
प्रस्ताव खारिज हुआ। माननीय उपाध्यक्ष : प्रश्न हैः
कि माननीय डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन में, नई प्रस्तावित धारा 4 में-
* संसदीय वाद-विवाद, खंड XV भाग II, 22 सितंबर, 1951, पृष्ठ ??