धारा 4-(संहिता का अध्यारोही प्रभाव) - Page 596

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( i ) भाग (क) में ‘‘संहिता में चर्चित’’ शब्दों के पश्चात् ‘‘ इस संहिता के लागू होने के दस वर्ष पश्चात्’’ शब्दों को जोड़ा जाए; और ( ii ) भाग (ख) के बाद में निम्नलिखित परिभाषा को समाहित किया जाए।

‘‘परिभाषा-इस संहिता के लागू होने से 10 वर्ष तक के लिए उप-धारा (क) में दिए गए किसी भी रीति-रिवाज के होते हुए भी, विद्यमान संदर्भ, नियम अथवा प्रचलित किसी भी प्रथा, का प्रभाव पड़ सकता है।’’

प्रस्ताव खारिज हुआ।

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कि माननीय डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन में, प्रस्तावित धारा 4 के भाग (क) में, ‘‘इस संहिता,’’ शब्द के पश्चात् जहाँ पर यह दूसरी बार आता है वहाँ पर ‘‘जहाँ तक इस संहिता में की गई किसी भी व्यवस्था के साथ संगत है’’ शब्दों को सम्मिलित किया जाए।

प्रस्ताव खारिज हुआ।

माननीय उपाध्यक्ष : अब हम अगले प्रस्ताव पर आते हैं।

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प्रश्न है :

कि माननीय डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन में प्रस्तावित धारा 4 में, निम्नलिखित प्रतिबंध जोड़ा जाएः-

‘‘व्यवस्था की गई है कि यह संहिता ऐसी विद्यमान प्रथाओं, रीति-रिवाजों और कानूनों को नजरअंदाज नहीं करेगी जो ऐसे लोगों के किसी भी वर्ग की, विशिष्ट संस्कृति का एक अंग है, जिन पर यह संहिता लागू होती है।’’

प्रस्ताव खारिज हुआ।

माननीय उपाध्यक्ष : अगला संशोधन 380 है। प्रश्न हैः

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कि धारा 4 के स्थान पर निम्नलिखित होना चाहिए।

‘‘4. इस अधिनियम के लागू होने से तत्काल पूर्व लागू हिंदू कानून के सभी शास्त्र, नियम और सभी रीति-रिवाज व प्रथाएँ, इस अधिनियम से जिस सीमा तक असंगत होंगी, वे सब प्रभावहीन हो जायेंगे।’’

प्रस्ताव खारिज हुआ।