वक्तव्य, डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के त्याग-पत्र देने पर दिया गया स्पष्टीकरण - Page 601

586 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वक्तव्य
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के त्याग-पत्र देने पर दिया गया स्पष्टीकरण

मुझे पूर्ण विश्वास है कि सदन यदि सरकारी तौर पर नहीं तो गैर-सरकारी तौर पर जानता है कि मैं मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं रहा हूँ। मैंने गुरुवार, 27 सितम्बर को प्रधान मंत्री के समक्ष अपना त्याग-पत्र प्रस्तुत कर दिया था तथा मुझे तत्काल कार्यभार मुक्त करने के लिए, मैंने उनसे कहा था। प्रधान मंत्री सहृदय थे जो उन्होंने उसके दूसरे दिन ही त्याग पत्र स्वीकार कर लिया। यदि मैं शुक्रवार 28 तारीख के पश्चात् मंत्री पद पर रहा तो केवल इसलिए, कि प्रधानमंत्री ने मुझसे इस पद पर सत्र के अंत तक बने रहने का अनुरोध किया था-एक निवेदन जिसका संवैधानिक परिपाटी के अनुसार मैं अनुपालन करने के लिए बाध्य था।

हमारी कार्यविधि के नियम, एक मंत्री को, जो अपने कार्यालय से त्याग-पत्र देता है, उसके त्याग-पत्र देने के स्पष्टीकरण के रूप में उसे निजी वक्तव्य देने की, आज्ञा प्रदान करते हैं। मेरे कार्यालय के कार्यकाल के दौरान मंत्रिमंडल के बहुत से सदस्यों ने त्याग-पत्र दिया। यद्यपि मंत्रियों की इस विषय में कोई एकरूप पद्धति रही है कि उन्होंने अपना वक्तव्य सहित त्याग-पत्र दिया हो। कुछ अपना वक्तव्य दिए बिना चले गए और अन्य अपना वक्तव्य प्रस्तुत करने के पश्चात् गए। बहुत दिनों से मैं दुविधा में था कि कौन-सा मार्ग अपनाऊँ। सभी परिस्थितियों पर विचार करने के पश्चात् मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि वक्तव्य देने की कोई विशेष आवश्यकता नहीं है, परन्तु त्याग-पत्र दे चुके एक सदस्य का सदन के प्रति ऋणी होने पर यह एक कर्तव्य है।

सदन को यह जानने का अवसर नहीं मिल पाता है कि मंत्रिमंडल आंतरिक स्तर पर किस प्रकार कार्य करती है, क्या वहाँ आपसी सद्भाव अथवा वैमनस्य है, केवल सामान्य कारण से ही कि मंत्रिमंडल में एक संयुक्त उत्तरदायित्व होता है जिसके अंतर्गत एक अल्पमत वाला सदस्य अपने मतभेद प्रकट करने का हकदार नहीं होता है। तदनुसार सदन यही सोचता रहता है कि कैबिनेट के सदस्यों के मध्य कोई भी मतभेद नहीं है जबकि वास्तविक दृष्टि से देखें तो एक विरोध बना रहता है। इसलिए, एक सेवा-निवृत्त हो रहे मंत्री का यह कर्तव्य है कि वह सदन को सूचित करते हुए एक वक्तव्य दे कि वह क्यों जाना चाह रहा है और वह आगे भी संयुक्त उत्तरदायित्व का निर्वाह करने के लिए इस पद पर बने रहने के योग्य क्यों नहीं है।

द्वितीय यह है कि, यदि एक मंत्री स्पष्टीकरण दिए बिना ही चला जाता है, तो लोग यह संदेह करेंगे कि या तो उस मंत्री के आचरण में, उसकी लोक-क्षमता अथवा