खंड 2 : (संहिता का प्रयोग) - Page 67

52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उनका क्या होगा? बहुत से अधिकार और उत्तरदायित्व हैं। मैं सदन को विभिन्न विचारों के स्पष्टीकरण से नहीं रोकना चाहता जो इसके कारण उठ सकते हैं। मैं साधारण रूप में सीधे से इस प्रकार कहूँगा कि एक परिवर्तित को बशर्ते कि उसके परिवर्तित होने के पहले के सभी अधिकार और उत्तरदायित्वों के तहत हिंदू होना चाहिए। मान लो एक गैर-हिंदू के पास बहुत-सी जायदाद है, और मान लो वह हिंदू हो जाता है। क्या आप उससे कहेंगे कि उसकी जायदाद नहीं रही? अगर उसे परिवर्तन से पहले किसी से उत्तराधिकार में मिलने वाला था क्या परिवर्तन के पश्चात् उसका उत्तराधिकार समाप्त हो जाएगा। मुझे लगा इससे सम्बन्धित कानून हैं, लेकिन मैं केवल प्रस्ताव रखता हूँ कि हमें परिवर्तित व्यक्ति के सभी अधिकार और उत्तरदायित्व को परिवर्तन के बाद बनाए रखना चाहिए। उसके पहले से मिले अधिकार वैसे ही रहने देना चाहिए उन्हें नहीं छेड़ना चाहिए। वे सभी अधिकार केवल परिवर्तन के कारण नहीं छीन लिए जाने चाहिए। अधिकार एक बार मिलने पर नहीं

खोने चाहिए। उत्तरदायित्वों को समाहार नहीं होने देना चाहिए, केवल इसलिए कि वह बाद में परिवर्तित हो गया। परिवर्तित होने से पिछले लेन-देन पिछले अधिकार और पिछले उत्तरदायित्व पर कोई प्रभाव नहीं होना चाहिए।

मेरा अगला संशोधन है खंड-2 का उपखंड (2) को समाप्त कर दिया जाना चाहिए। यह उपखंड इस प्रकार है;

‘‘यह संहिता किसी भी व्यक्ति जो धर्म से मुसलमान, ईसाई, पारसी या यहूदी नहीं है पर लागू होता है....’’

मेरे द्वारा रखा गया उपखंड गलत विचारों और गलत क्रम तथ्यों पर आधारित है। भाग (क) के मुताबिक हमने कहा है कि यह संहिता लागू होगी ‘‘सभी हिंदुओं पर जैसा कहा जाता है, सभी व्यक्तियों पर जो किसी भी रूप और इसके किसी विकसित स्वरूप को मानते हैं।’’

और हम कहते हैं कि यह लागू होगा;

‘‘किसी भी व्यक्ति पर जो धर्म से बौद्ध, जैन या सिख है।’’ लेकिन मेरे विचार से सिख उन पर इस संहिता के लाभों को लादे जाने पर बहुत अधिक खुश नहीं है। मेरे मित्र सरदार हुकम सिंह हिंदू संहिता के अंतर्गत तथाकथित लाभों को छोड़ने को तैयार हैं जो अब सिखों पर लादे जा रहे हैं। जब तक वे सिख हैं मैं नहीं सोचता कि हिंदू संहिता उन पर लागू की जा रही है, से वे प्रसन्न होंगे और........।

श्री त्यागी : वे हिंदू हो सकते हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : लेकिन सरदार हुकम सिंह अपने समुदाय के लिए

h#n~n hu
v ge n

स्वयं बोलें। मैं तो केवल.....