खंड 2 : (संहिता का प्रयोग) - Page 68

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श्री खुर्शीद लाल : हाँ आप तो अपने लिए बोल रहे हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : अब हम भाग (ग) (1) पर आते हैं, जो कहता है कि संहिता किसी वैध या अवैध आदि बच्चे पर लागू होगा। एक हिंदू, हिंदू है और हिंदू का बच्चा हिंदू होना चाहिए। लेकिन मैं जो कहता हूँ वह है। उपखंड (2) की स्थिति कुछ ठीक नहीं लगती, क्योंकि यह कहता है कि संहिता दूसरे सभी व्यक्तियों पर जो धर्म से मुसलमान, ईसाई, पारसी या यहूदी नहीं है पर लागू होगी। प्रारूप की दृष्टि से देखें तो यह किसी चीज के प्रारूप को बनाने का एक घुमावदार तरीका है, और यह एक विचार को टुकड़ों में रखना दर्शाता है। और अगर यह ही विचार है तो सीधे से क्यों नहीं कहें कि सभी व्यक्ति जो मुसलमान ईसाई, पारसी या यहूदी नहीं हैं हिंदू हैं ऐसा करने के बजाए आप सबसे पहले कहें तब आप कहें कि बौद्ध, जैन और सिख हिंदू हैं और तब आप कहें कि संहिता सभी व्यक्तियों पर, जो मुसलमान, ईसाई, पारसी और यहूदी नहीं है, पर लागू होगी। मैं सोचता हूँ कि सबसे सीधा और तर्कपूर्ण तरीका इस परिभाषा के लिए इस प्रकार कहें कि सभी मनुष्य जो मुसलमान, ईसाई, पारसी या यहूदी नहीं हैं हिंदू हैं। इसका अर्थ यही है। इसलिए मेरा प्रस्ताव है उस समय प्रारूपकार के मस्तिष्क में कुछ हिचक रही होगी और यह विचार बाद में आया होगा नहीं तो उनका वास्तव में क्या अर्थ है इसे कहने से नहीं रोका जा सकता था।

लेकिन खंड-2 के उपखंड (2) में एक बाधा है। क्या यह आवश्यक है कि एक व्यक्ति जो मुसलमान, ईसाई, पारसी, यहूदी नहीं है, हिंदू है। जैसा कि यहाँ एक मित्र ने सुझाया वह एक वामपंथी हो सकता है। या वह सिन्टोनिज्म धर्म जो, जापान में माना जाता है, को मानने वाला हो सकता है। यह ही एक अटल सिद्धांत कैसे माना जा सकता है कि एक व्यक्ति ईसाई, पारसी, मुसलमान, यहूदी या हिंदू ही होगा? ऐसा व्यक्ति भी हो सकता है जो किसी धर्म को न मानता हो या कोई व्यक्ति जिसका धर्म इन बड़े धर्मों से कुछ अलग हो।

श्री त्यागी : हिन्दुत्व सभी धर्मों का मिश्रण है।

श्री नजरुद्दीन अहमद : वास्तव में हिंदू कानों को सुनना बहुत अच्छा लगता है कि बाकी सब हिंदू धर्म को मानते हैं। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या इस संहिता के लाभ किसी पर थोपे जाने चाहिए? क्या हमें किसी को हिंदू कह कर उस पर यह संहिता थोपनी चाहिए? यह ही बिन्दु है। मान लो यहाँ कुछ विदेशी हों या उनके नौकर या सहायक या मित्र हों। हम पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं और हम भारत में ऐसे बहुत से व्यक्ति की सम्भावना कर सकते हैं। और मान लो एक ऐसे विदेशी की भारत में मृत्यु हो जाती है। उसका धन किसे मिलेगा?