खंड 2 : (संहिता का प्रयोग) - Page 69

54 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. अम्बेडकर : अगर वह भारत में मर जाता है तो उसके धन के आप उत्तराधिकारी होंगे।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : प्रश्न यह है, क्या उन लोगों को जो इनमें से किसी धर्म से सम्बन्धित नहीं है, इसका शिकार होगा, पर इस हिंदू संहिता के कहे जाने वाले लोग-थोपे जाने चाहिए? हिंदू समुदाय यहाँ रहता है और इस सदन में पूर्ण अल्पमत में हैं, लेकिन इसके बाहर बहुत-सी आपत्तियॉ उठाई जा रही हैं और ऐसा होते हुए, क्या तथाकथित लाभ सभी पर थोपे जाने चाहिए? क्या संहिता सभी पर जो मुसलमान, ईसाई, पारसी या यहूदी नहीं है आप जबरदस्ती लादेंगे और क्योंकि वे इन धर्मों में से किसी से भी सम्बन्धित नहीं हैं क्या वे आवश्यक रूप से हिंदू धर्म से सम्बन्धित होंगे? क्या संहिता उन पर लागू होनी चाहिए? यह प्रश्न है जिसका सदन को उत्तर देना होगा। मेरा प्रस्ताव है कि उपखंड-2 को हटा दिया जाना चाहिए क्योंकि यह एक ऐसा विधेयक बनाने का प्रस्ताव है जिसे नहीं माना जाना चाहिए। हमें धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहिए आपको संहिता ऐसे व्यक्तियों पर जबरदस्ती नहीं लादनी चाहिए। ऐसे लोग हो सकते हैं जो किसी दूसरे धर्म को मानते हां या जिनका कोई धर्म न हो या विश्व में कोई नया धर्म आ जाए और उन पर कानून लागू नहीं किया जाना चाहिए। कानून को धीरे-धीरे लागू करना चाहिए। इस वृह्त अधिनियम का प्रभाव धीरे-धीरे होना चाहिए। वास्तव में मेरे माननीय मित्र श्री कपूर ने जो संशोधन प्रस्तुत किया है उसके कुछ हिस्से बहुत हद तक विवेकपूर्ण हैं जिनमें कहा गया है कि संहिता केवल उन व्यक्तियों पर ही लागू होनी चाहिए जो उसे पसंद करते हैं। श्री झुनझुनवाला के संशोधन का भी यही तात्पर्य है। यद्यपि उसके विस्तार के विषय में कुछ मतभेद है। लेकिन प्रमुख सिद्धांत यह है कि संहिता उन्हीं पर लागू होनी चाहिए जो चाहते हैं कि उन पर लागू हो। इसलिए हिंदू की यह परिभाषा वांछित नहीं है। अगर हिंदू संहिता में यह विरोधाभाष न होता और यह सभी को मान्य होती तो कोई कठिनाई नहीं थी। इसलिए संशोधन के उस भाग को मानने...

पंडित कृष्ण चन्द्र शर्मा (उत्तर प्रदेश) : इसका तात्पर्य यह हुआ कि सभी को

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अपने लिए कानून बनाने की छूट होनी चाहिए।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : आप एक व्यक्ति के गले में जबरदस्ती दवाई ठूंसने का प्रयत्न कर रहे हैं जो उसे पसंद नहीं है। संहिता कितनी भी अच्छी क्यों न हो आप उसे हिंदू समुदाय के गले में जबरदस्ती नहीं उतार सकते।

एक माननीय सदस्य : यह कौन कहता है? यह हम सभी चाहते हैं।