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सदस्य को व्यक्तिगत तौर पर बताया गया है तो मैं इसे नोटिस में नहीं ले सकता हूँ। बंगाल सरकार इस विधेयक के विरुद्ध है। बड़े लोग भी इसके विरुद्ध हैं।
श्री सोंधी (पंजाब) : मुझे बताया गया है कि उन्होंने समझौता कर लिया है।
श्री नजीरुद्दीन अहमद : मेरे विचार से उन्होंने कोई समझौता नहीं किया है। आप किसी भी बार एसोसियेशन में जाइए और उनकी बात सुनिए, वे इससे परेशान हैं। जिस उत्साह से विधेयक को सदन में पारित करने की माँग की गई है....
एक माननीय सदस्य : क्या यह संशोधन से सम्बन्धित है?
माननीय अध्यक्ष : मैं संशोधन संख्या 31 की ओर ध्यान आकर्षित करूँगा। यह पूरी तरह प्रसंगिक है।
श्रीमती दुर्गाबाई : वे केवल अपनी बात दोहरा रहे हैं।
श्री त्यागी : चँकि माननीय सदस्य ने कहा है कि बंगाल सरकार हिंदू संहिता के विरुद्ध है, मैं उनसे यह जानना चाहता हूँ कि क्या बंगाल सरकार के मुख्य सचिव इसके विरुद्ध हैं?
श्री खुर्शीद लाल : वे बंगाल सरकार नहीं हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमद : भारत सरकार ने विधेयक को परिचालित किया तथा इस पर मत जानना चाहा। विभिन्न राज्य सरकारों ने अपने मत प्रकट किये और ये मत हमें परिचालित किये गये हैं। मैंने बंगाल सरकार के साथ व्यक्तिगत रूप से कोई सम्पर्क नहीं किया है। हमें जो जनमत हैं, उससे यह पता चलेगा कि बंगाल सरकार ने विधेयक का विरोध किया है।
पंडित मालवीय (उत्तर प्रदेश) : यदि उनके लिए यह उपयुक्त नहीं है तो वे इसे क्यों देखें?
श्री नजीरुद्दीन अहमद : उन्हें लगता है कि यह कानून बंगाल की धरती के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके अलावा, कलकत्ता उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों ने जिन्हें मैं समझता हूँ कि उन्हें शिक्षित लोग समझा जाना चाहिए, न कि कट्टरपंथी और निम्नतम वर्ग के लोग, वे अच्छी संस्कृति में रहने वाले प्रतिभावान व्यक्ति हैं। वे मात्र कट्टरपंथी नहीं हैं : संयुक्त रूप से यह मत व्यक्त किया कि वे विधेयक का विरोध करते हैं।