60 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और सिखों के सम्बन्ध में, मैं उन्हें हिंदुओं में शामिल किये जाने के पक्ष में हूँ। बशर्तें वे हिंदू संहिता का पालन करने पर सहमत हों, जो धर्म से मुसलमान, ईसाई, पारसी और यहूदी नहीं हैं, वे भी हिंदू हैं, परन्तु आप कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति जो यद्यपि हिंदू नहीं है, हिंदू अत्यधिक असंतोषजनक दृष्टिकोण है।
श्री त्यागी : वह यद्यपि यथार्थ में हिंदू नहीं है, परन्तु वह कानूनन हिंदू है।
श्री नजीरुद्दीन अहमद : यदि आप किसी को ‘हिंदू’ कहना चाहते हैं तो मुझे
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कोई आपत्ति नहीं है। यह बहुत आसान है। आप आसानी से उसे हिंदू कह सकते हैं। फिर यह चक्रीय अभिव्यक्ति क्यों? मैं कहता हूँ कि इससे दिमागी भ्रम का पता चलता है।
डॉ. अम्बेडकर : मुझे अफसोस है कि इस सदन में आप सबसे अधिक परेशान
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हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमद : मेरे पास अन्य संशोधन हैं जिन्हें मैं कल बताने की
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कोशिश करूंगा, बशर्तें मेरे भाषण के दौरान इस तरह की टोका-टाकी न हो।
तत्पश्चात् सभा मंगलवार, 6 फरवरी, 1951 को 10.45 बजे तक के लिए स्थगित हुई।