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हिंदू कोड - जारी
* माननीय अध्यक्ष : जैसा कि प्रवर समिति ने सूचित किया है, सदन अब हिंदू कानून की कतिपय शाखाओं को संशोधित करने तथा उन्हें संहिताबद्ध करने के लिए विधेयक पर आगे विचार करेगा। खंड-2 पर चर्चा हो रही है। श्री नजीरुद्दीन अहमद अपना भाषण जारी रखेंगे।
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श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगाल) : महोदय, सर्वप्रथम मैं कहना चाहूँगा
कि यह सदन खुशहाली की अवस्था में है। मैं समझता हूँ कि यह विषय बहुत ही महत्वपूर्ण है और इस पर गम्भीर विचार-विमर्श की जरूरत है। कल, मैंने अपने कुछ संशोधनों को प्रस्तुत किया था। अब मैं संशोधन संख्या 31 पर आता हूँ जो कि निम्नलिखित हैं :-
खंड 2 के उप-खंड (4) के पश्चात् निम्नलिखित नया उप-खंड जोड़ा जाये :-
‘‘(5) इस धारा में अन्य बातों के होते हुए भी, यह संहिता किसी भी राज्य में केवल उन्हीं क्षेत्रों अथवा उन्हीं लोगों अथवा उन्हीं वर्गों पर उस समय से अथवा उन चरणों द्वारा लागू होगी जैसा राज्य विधानमंडल समय-समय पर विधेयक द्वारा उपबंध करे।’’
यह विधेयक अत्यधिक विवादित है और यह उन लोगों के लिए उचित नहीं है जो मानते हैं कि सम्पूर्ण हिंदू आबादी पर यह विधेयक थोपने से देश को बहुत लाभ होगा। मेरा अनुरोध है कि इस सदन को जल्दबाजी में कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए। मैं यह नहीं कहता हूँ कि इस सदन का कोई क्षेत्राधिकार नहीं है, परन्तु मेरा अनुरोध है कि इस सदन को उन लोगों पर जबरदस्ती कोई कानून थोपने की गम्भीर जिम्मेदारी अपने ऊपर नहीं लेनी चाहिए जो इसके इच्छुक नहीं हैं। इस सदन को ब्रिटिश सरकार से आजादी प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से गठित किया गया था और समयान्तराल में इसने अपने संवैधानिक अधिकार के माध्यम से संविधान पारित किया।
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : महोदय, क्या यह इस समय प्रासंगिक है। मैं चर्चा
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में हस्तक्षेप नहीं करना चाहूँगा परन्तु हमने चार घंटे से अधिक समय एक ही खंड पर चर्चा करने में लगा दिये हैं।
माननीय अध्यक्ष महोदय : मैं एक या दो मिनट के लिए देख रहा था कि क्या माननीय सदस्य की बात से कुछ सार्थक बहस हो सकती है।
* स्ां. वा. वि. भाग VIII, खंड II, 6 फरवरी, 1951 पृष्ठ 2425-83