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राज्य सरकारें लोगों की दशा, उनकी इच्छाएं तथा आवश्यकताओं को बेहतर जान सकती हैं। इसलिए, यह उचित है कि प्रत्येक राज्य को इस कानून को उस सीमा तक तथा उन चरणों के जरिये लागू करने की अनुमति दी जाए जैसाकि विधानमंडल, अधिनियम के माध्यम से प्रावधान करें। मैं जानता हूँ कि जहाँ तक रिपोर्टें मिली हैं, बंगाल सरकार ने इस विधेयक का विरोध किया है। यद्यपि कल यह कहा गया था कि किसी माननीय सदस्य ने अपने व्यक्तिगत कार्यालय में यह खुलासा किया था कि बंगाल में किसी मंत्री ने इसका पक्ष लिया है, वह बंगाल सरकार का वास्तविक निर्णय नहीं था। मैं कहना चाहूँगा कि प्रत्येक राज्य की इस विधेयक के संबंध में अपनी-अपनी समस्यायें हैं। उदाहरणार्थ, सभ्यता, आर्थिक स्थिति और विभिन्न अन्य समस्याएं। मेरा यह कहना है कि जो सदस्य इस विधेयक के पक्ष में हैं, उससे अधिक इसके विपक्ष में हैं। इसलिए हमें कोई बीच का रास्ता ढूँढना चाहिए, जो इसे अच्छा समझते हैं। वे इसे स्वीकार कर लें, परन्तु अन्य लोगों पर इस विधेयक को नहीं थोपा जाए।
अब, जहाँ तक राज्यों का संबंध है, राज्य विधानमंडल ही एक ऐसा उचित प्राधिकरण है जो कानून को लागू कर सकें तथा इसे मामले की विभिन्न परिस्थितियों के अनुसार कार्यान्वित कर सकें। यद्यपि इस विधेयक के प्रभारी मंत्री कानूनों को समान रूप से लागू करने की बात करते हैं, मेरे विचार से यह एक ऐसा सिद्धांत है जिसके आधार पर व्यावहारिक रूप से विचार-विमर्श हो सकता है। मेरा अनुरोध है कि विधेयक पर वास्तविक मत जानने के लिए राज्य विधानमंडल ही उचित प्राधिकरण है तथा विधेयक का कार्यान्वयन भी उन्हीं के द्वारा नियंत्रित होना चाहिए। इस सिद्धांत पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, जैसा कि दावा किया गया है, यदि यह विधेयक लाभकारी है, लोगों को स्वीकार्य है, भारत के हिंदुओं को स्वीकार्य है तो राज्य विधानमंडलों को अपना मत प्रकट करने देने में कोई हर्ज नहीं है। राज्य सरकारों के अपने-अपने विभाग हैं जिनके माध्यम से वे जनता की इच्छाओं को जानने की स्थिति में हैं तथा साथ ही, राज्य विधानमंडल के सदस्य भी लोगों के मस्तिष्क की बात जानने की स्थिति में हैं। इसलिए, विभिन्न परिस्थितियों में तथा विभिन्न लोगों पर इस विधेयक को लागू करने का काम स्थानीय विधानमंडलों पर छोड़ दिया जाना चाहिए। यदि ऐसा किया जाता है तो विधेयक के बारे में अधिकांश गलत धारणाएं तथा उसकी आपत्तिजनक बातें स्वयं ही विलुप्त हो जायेंगी तथा विवाद शीघ्र ही समाप्त हो जाएगा। जितना अधिक इस विधेयक के समर्थन के प्रति आश्वस्त होंगे, उतना ही अधिक वह स्वीकार्य होगा तथा उन्हें स्थानीय विधानमंडलों द्वारा विधेयक को स्वीकार किये जाने की परीक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। यह संशोधन एक महत्वपूर्ण व्यवस्था का प्रश्न उठाता है। और यदि दावे उतने ही बड़े हैं