64 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जैसा कि कहा गया है, तब इस नियम व्यवस्था को स्वीकार किया जाना। यह बात सही है कि राज्यों में कुछ स्थान ऐसे हैं जहाँ यह कानून विपरीत प्रभाव डाल सकता है, तलाक सम्बन्धी विभिन्न प्रावधान हैं तथा देश के विभिन्न भागों में विवाह और तलाक के लिए विभिन्न प्रथाएँ हैं। यदि हम इस विधेयक को उन पर सीधे थोप देते हैं तो इससे विवाह और तलाक की सरल प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ेगा तथा इस संबंध में प्रक्रिया और भी जटिल हो जायेगी। इससे उनके मौजूदा अधिकारों पर प्रभाव पड़ेगा। कई लोग ऐसे भी हैं जो विधेयक के निर्दिष्ट प्रावधानों के अनुसार विवाह और तलाक के अधिकारों का प्रयोग नहीं करना चाहते हैं। अतः उनके लिए यह एक कठिनाई ही होगी, किसी भी रूप में, प्रत्येक राज्य की विशिष्ट परिस्थितियों में इस विधेयक का कार्यान्वयन स्थानीय विधानमंडल पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
महोदय, मुझ पर कई बार ताने भी मारे गये हैं। दोपहर 12.00 बजे
बाबू रामनारायण सिंह (बिहार) : नहीं।
श्री नजीरुद्दीन अहमद : वह मेरा विशेषाधिकार रहा है। मेरे विचार से विलम्ब दो कारणों से हुआ है और डॉ. अम्बेडकर इसके लिए स्वयं जिम्मेदार हैं। सर्वप्रथम, यह विधेयक प्रवर समिति को भेजा गया था। वहाँ से यह एक नये विधेयक के रूप में आया, इससे कुछ विवाद पैदा हुआ, जिसमें लगभग छः महीने लग गये। मैं यह कहना चाहता हूँ कि यह विलम्ब मेरी वजह से नहीं हुआ। यदि मेरा कोई दोष था तो वह मेरे द्वारा उसमें गलतियाँ निकालना था और तत्पश्चात् सदन को ही अपना विनिर्णय देना था। श्री बी. दास. (उड़ीसा) : क्षमा क्यों माँगे?
श्री नजीरुद्दीन अहमद : स्वयं डॉ. अम्बेडकर के कारण ही हुआ था। मैं इसके लिए उन्हें दोषी नहीं ठहराता हूँ। मैं नहीं समझता कि इसके पीछे उनका कोई इरादा था।
डॉ. अम्बेडकर : वह मुझे माफ करते हैं!
श्री नजीरुद्दीन अहमद : शायद, वह मामले को सुधारना चाहते थे तथा उसे और भी खराब बनाना चाहते थे।
विलम्ब का दूसरा कारण यह था.....
डॉ. अम्बेडकर : मैं नहीं समझता कि इस सभा के किसी सदस्य ने मेरे माननीय सदस्य पर विलम्ब का आरोप लगाया है और मैं यह नहीं समझ पाया कि वह बेवजह स्पष्टीकरण दे रहे हैं। वह समय बर्बाद कर रहे हैं।