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श्री जे. आर. कपूर (उत्तर प्रदेश) : गैर-हिंदुओं को पहले ही इसके कार्य-क्षेत्र के अंतर्गत लाया जा चुका है।
पंडित ठाकुर दास भार्गव : यह पूर्णतः गलत है, जहाँ तक मुसलमानों, ईसाइयों, पारसियों और यहूदियों का संबंध है, इसमें विशेष रूप से उल्लेख है कि यह कानून उन पर लागू नहीं होगा, मेरे मित्र का वह सुझाव कहाँ है कि इसे मुसलमानों, ईसाइयों, पारसियों और यहूदियों पर पहले ही लागू किया जा चुका है?
श्री जे. आर. अपूर : मैंने कहा कि मुसलमानों, ईसाईयों आदि के अलावा गैर-हिंदू आदि।
माननीय सभापति : अब कोई व्यवधान नहीं होना चाहिए।
श्री आर. के. चौधरी (असम) : महोदय, क्या मैं जान सकता हूँ कि हिंदू कानून अब मुसलमानों, बोहरा तथा कच्छ मैमन पर भी लागू नहीं होता है?
पंडित ठाकुर दास भार्गव : मेरे मित्र को मेरे से पहले ही जानकारी है। जैसा कि हमें ज्ञात है, वर्तमान हिन्दू कानून कई वर्गों के लोगों पर लागू नहीं होता है। यह उन लोगों पर लागू होता है जो अपने आप को हिंद़ू नहीं कहते हैं तथा आज तक उन्होंने इस पर आपत्ति नहीं की है। जहाँ तक सिख, जैन, बौद्ध का संबंध है, इन पर हिंदू कानून लागू होता है। और यह उन पर ब्रिटिश सरकार के समय से लागू है। वे इसे हमेशा इस्तेमाल करते रहे हैं। मुसलमान भी इसे अपना रहे हैं। (एक माननीय सदस्य : आप उन्हें अलग कर रहे हैं)। हम उन्हें अलग नहीं कर रहे हैं ‘खंड-2’ के अनुसार यह हिंदू संहिता उन सभी व्यक्तियों पर लागू होगी जो मुसलमान, ईसाई, पारसी और यहूदी नहीं हैं। जहाँ तक मुसलमानों का संबंध है और जहाँ तक उनके कानून का संबंध है, हमने कोई परिवर्तन नहीं किया है और उनके लिए कोई कानून नहीं बनाया है। हम यह नहीं कहना चाहते हैं कि हिंदू कानून द्व ारा परिवर्तित उनकी प्रथाएँ समाप्त हो गई हैं।
पंजाब का उदाहरण ले लीजिए। हम हिंदू कानून से बंधे नहीं हैं। मैं पंजाब के गांवों की बात कह रहा हूँ। जहाँ तक नगरों का संबंध है, बहुत से हिंदुओं और मुसलमानों पर हिंदू और मुस्लिम कानून लागू होते हैं, जहाँ तक शेष पंजाब का संबंध है, हम प्रथा के अनुसार चलते थे। प्रथा या रिवाज ही हिंदुओं, मुसलमानों और सिखों के लिए पंजाब में प्रथम निर्णायक नियम था। आज भी हम प्रथा के अनुसार ही चलते हैं। महोदय, क्या मैं आपकी अनुमति से रैट्टीगन द्वारा लिखित पंजाब कस्टमरी लॉ’ के प्रारम्भिक खंड को पढ़ सकता हूँ? इसमें कहा गया है ‘‘इस प्रांत में प्रथा, निर्णय का पहला नियम है, चाहे वह उत्तराधिकार, स्त्रियों की विशेष सम्पत्ति, सगाई, विवाह,