71
सके कि वह हिन्दुत्व के पुराने मतों के अनुसार हिंदू हैं। इस देश के शिक्षित हिंदुओं की वर्तमान मानसिकता एक तरह से चुनने की है। वे आर्य समाज, ब्रह्म समाज के अनुयायी हैं, कुछ लोगों के मन-मस्तिष्क में कतिपय धारणाएँ ऐसी हैं जिन्हें हमने मुसलमानों, ईसाईयों और अन्य धर्मों से ग्रहण कर लिया है। शिक्षित हिंदू : मैं अपने तथा कुछ दोस्तों के बारे में कह सकता हूँ कि वे एक तरह की छूट चाहते हैं। हम प्रत्येक धर्म में से बेहतर बात चुनते हैं और यह सोचना शुरू कर देते हैं कि वही सही है और हिंदू धर्म है। शायद, यही शेष विश्व के संबंध में भी सत्य हो। वह सच्चा ईसाई आज कहा गया जो बाइबिल के उपदेशों में विश्वास करता है? मैं मोहम्मद कानून से भी उद्धत कर सकता हूँ। एक सच्चा मुसलमान कहाँ मिलता है? हम जानते हैं कि पैगंबर मोहम्मद ने एक ऐसी कन्या से शादी की थी जो 14 वर्ष से कम आयु की थी। जब अधिनियम पारित हुआ, यदि इस सदन के माननीय सदस्यों को अच्छी तरह ज्ञात हो, श्री मोहम्मद अली ने क्वीन गार्डन में केवल शारदा अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए ही शादी की थी क्योंकि लोगों ने लिखा था कि शारदा अधिनियम ने मुस्लिम धर्म में नाबालिग के साथ शादी करने की स्वतंत्रता को समाप्त करके इसमें दखल दिया था। वे व्यक्ति जिनकी धर्मों के बारे में पूर्वधारणा होती है कुछ भी कह सकते हैं, परन्तु इस समय कोई रूढि़वादी हिंदू धर्म, मुस्लिम धर्म और ईसाई धर्म नहीं है। यही कटु सत्य है और मुझे आश्चर्य नहीं है कि डॉ. अम्बेडकर ने ऐसा विधेयक प्रस्तुत किया है जो वर्तमान समय के अनुकूल है। इनमें से अधिकतर प्रावधान उन लोगों को नये लगते हैं जो पूर्णतः रूढि़वादी हैं परन्तु साथ ही, हमें यह मानना चाहिए कि हमने आधुनिक सभ्यता के अनुसार अत्याधिक प्रगति की है तथा अब हम पीछे नहीं मुड़ सकते हैं। यदि वे पूर्व के उन सभी विचारों को वापस लाना चाहते हैं जिन्हें समाज ने व्यावहारिक रूप में ठुकरा दिया है, तो वे गलती कर रहे हैं। वास्तव में, डॉ. अम्बेडकर ने अपने मन से प्रयास नहीं किया है......
श्री आर. के. चौधरी : माननीय सदस्य जो भी कह रहे हैं। हम उससे ज्यादा उलझते जा रहे हैं। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि क्या माननीय सदस्य चाहते हैं कि वर्तमान हिंदू संहिता से पंजाब कस्टमरी लॉ को संशोधित किया जाना चाहिए और क्या पंजाब कस्टमरी लॉ में दो शादियों पर प्रतिबंध है या नहीं। यदि दो शादियों पर प्रतिबंध नहीं है और यदि माननीय सदस्य चाहते हैं कि पंजाब को हिंदू संहिता के कार्यान्वयन से बाहर रखा जाये, तो क्या मैं दो शादियों के बारे में उनके विचार जान सकता हूँं?
माननीय सभापति : माननीय सदस्य को यह पता होना चाहिए कि उन्होंने अपनी बात पहले ही स्पष्ट कर दी है तथा जो माननीय सदस्य बोल रहा है, उन्हें अपनी बात करनी दी जाए तथा उन्हें बार-बार बीच में नहीं टोका जाना चाहिए।