72 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पंडित ठाकुर दास भार्गव : मुझे खुशी है कि मेरे माननीय मित्र ने मुझसे एक
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प्रश्न पूछा है। जहाँ तक दो पत्नियों का संबंध है, मैंने कुछ समय पहले अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी जब मैंने इस सदन में विधेयक प्रस्तुत किया था। इस विधेयक को संपूर्ण भारत में, चाहे वे मुसलमान हों, हिंदू हों, ईसाई हों, पंजाब के लोग हों अथवा अन्य कोई हो, एक पत्नी के सिद्धांत को लागू करने के लिए तैयार किया गया है। मैं यह चाहता हूँ कि जहाँ तक इस कस्टमरी लॉ का संबंध है मान्य विचारों से मेल
खाती है, तो हमें इन विचारों को स्वीकार करना चाहिए। मैं चाहता हूँ कि पंजाब अथवा अन्य स्थानों पर दो पत्नियाँ रखने की प्रथा नहीं होनी चाहिए, यही मेरा विनम्र निवेदन है। जहाँ तक उनके द्वारा उठाये गये सामान्य प्रश्न का संबंध है कि क्या हिंदू संहिता को किसी प्रथा को संशोधित करना चाहिए अथवा नहीं, मेरे विचार से जहाँ तक हमारी प्रथा का संबंध है, मैं पंजाब में इसके लिए कटिबद्ध हूँ और हम उसी प्रथा को चलाना चाहते हैं।
जहाँ तक रीति-रिवाज और अन्य बातों का संबंध है, यदि मेरे माननीय मित्र ने मेरे द्वारा दिये गये संशोधनों को पढ़ा हो तो उन्हें पता चलेगा कि मेरी इच्छा है कि सभी स्थानों पर अच्छी प्रथाएँ पहले की तरह रहनी चाहिएं, क्योंकि मैं उस तरह से इस धरती के लोगों के कानून को हिसंक ढंग से बदलने के पक्ष में नहीं हूँ जिस तरह यह हिंदू संहिता चाहती है। (सुनो, सुनो)। साथ-ही, मैं यह नहीं चाहता हूँ कि हिंदू संहिता के कुछ भाग सम्पूर्ण भारत पर लागू हो। चँकि मुझे किसी बात को उठाने के उद्देश्य से प्रशंसा मिली है और इसे मैं स्वयं पसन्द नहीं करता हूँ। मैं एक बात स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैं इस हिंदू संहिता के विरुद्ध नहीं हूँ। मैं चाहता हूँ कि इस संहिता के कुछ भागों को लागू किया जाये, परन्तु कुछ भाग ऐसे भी हैं, जिन्हें मैं पसन्द नहीं करता हूँं (व्यवधान)। जहाँ तक इस हिंदू संहिता के कतिपय सिद्धांतों का संबंध है : जो सार्वभौमिक स्वरूप के हैं और जो समाज में सुधार लायेंगे : मैं चाहता हूँ कि इन प्रावधानों को पंजाब पर लागू करना चाहिए और इसीलिए मैं इस संशोधन का समर्थन कर रहा हूँ। माननीय सदस्यों ने उन संशोधनों को पढ़ा नहीं है जो मैंने पहले ही दे दिये हैं। संशोधन इस प्रकार हैं :-
खंड-2 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये :-
‘‘2. धारा 1 के प्रावधानों के आधार पर यह संहिता :-
(क) उन सभी व्यक्तियों जो धर्म से हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख हैं;
(ख) कोई अन्य व्यक्ति जो धर्म से मुसलमान, ईसाई, पारसी अथवा यहूदी नहीं
है;