हिंदू कोड - जारी - Page 88

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(ग) वह प्रत्येक महिला जिसने ऐसे व्यक्ति से विवाह किया है जो धर्म से न तो मुसलमान, ईसाई, फारसी अथवा न ही यहूदी था;

(घ) कोई वैध या अवैध बच्चा जिसके माता-पिता में से एक धर्म से न तो मुसलमान, ईसाई, पारसी और ना ही यहूदी था;

(ड.) ऐसा व्यक्ति जो मुस्लिम, ईसाई, पारसी और यहूदी धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है; पर लागू होता है।

मैं चाहता हूँ कि इस हिंदू संहिता को मेरी इच्छाओं के अनुसार सदन द्वारा संशोधित किये जाने के बाद पंजाब पर लागू किया जाए, मैं नहीं चाहता हूँ कि जहाँ तक पंजाब का संबंध है, वहाँ की प्रथाओं को इस हिंदू संहिता द्वारा तीव्रता से परिवर्तित किया जाये। परन्तु इसके साथ-साथ मैं हिंदू संहिता के स्वीकार योग्य प्रावधानों को स्वीकार करना चाहता हूँ जहाँ तक दो पत्नियों का संबंध है। यह प्रथा पंजाब में प्रचलित नहीं है। हम पंजाब में एक पत्नी अथवा पति के प्रावधान को बनाए रखना चाहते हैं।

श्री आर. के. चौधरी : मैं अपने द्वारा की गई प्रशंसा के शब्द वापस लेता हूँ।

श्री जे. आर. कपूर : क्या मैं यह समझूं कि माननीय सदस्य ने यह सुझाव दिया है कि देश के विभिन्न भागों तथा समुदाय के विभिन्न वर्गों को इस संहिता के विशेष प्रावधानों जो उन्हें स्वीकार्य हैं को चुनने की अनुमति दी जाए?

माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य को पीठासीन अधिकारी को सम्बोधित करना चाहिए और उन्हें चेयर के माध्यम से ही प्रश्न पूछना चाहिए।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : मुझे बहुत प्रसन्नता होती यदि श्री कपूर ने मुझसे यह प्रश्न पूछा होता। चूँकि मैंने भी कल श्री कपूर से प्रश्न पूछा था, उन्होंने इसे बराबर कर दिया है। जब श्री कपूर बोल रहे थे तो मैंने उनसे पूछा था कि क्या वह चाहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को एक विशेष खंड को चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए और क्या वह इससे बंधा रहेगा अथवा नहीं। उनका कथन यह था कि हिंदू संहिता, जिसमें कई धाराएँ हैं, में से प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह हिंदू हो, मुसलमान हो, ईसाई हो, पारसी हो अथवा अन्य कोई हो, एक विशेष धारा को चुन सकता है तो अपने आप को उससे बांध सकता है।

श्री जे. आर. कपूर : मैं यह स्पष्ट कर दूँ कि मैंने ऐसा कभी नहीं कहा था मैंने यह कहा था कि संहिता के सभी भागों में किसी को भी एक विशेष भाग चुनने की छूट होनी चाहिए। इसमें विवाह, गोद लेने और पैतृक सम्पत्ति आदि से संबंधित विभिन्न