हिंदू कोड - जारी - Page 90

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जैसाकि मैंने निवेदन किया है, नागरिक संहिता का प्रश्न इस विषय से भी नहीं जुड़ा है। यद्यपि मैं उन लोगों की सराहना करता हूँ जो सम्पूर्ण भारत के लिए एक ही नागरिक संहिता चाहते हैं, मैं इस बात से सहमत नहीं हूँं मैं यह नहीं सोचता हूँ कि मुसलमानों, ईसाईयों, यहूदियों आदि के लिए एक ही नागरिक संहिता लागू करना व्यावहारिक होगा। हमारे मित्र श्री नजीरुद्दीन अहमद की क्या प्रतिक्रिया थी? वह कभी भी इस पर सहमत नहीं थे। उन्होंने संविधान के अंतर्गत मूल अधिकारों का प्रश्न उठाया और कहा कि आप इस हिंदू संहिता को लागू नहीं कर सकते हैं। जब इनसे प्रश्न पूछने की बारी आयी कि क्या वह हिंदू संहिता का पालन करना चाहेंगे तो उन्होंने कहा, ‘‘यह हिंदुओं के लिए भी खराब है; मैं विनम्रतापूर्वक निवेदन करता हूँ कि वास्तव में, मेरे उन माननीय मित्रों को यह प्रस्ताव करते हैं कि इस हिंदू संहिता को मुसलमानों, ईसाइयों आदि पर लागू किया जाना चाहिए, ये इस संवैधानिक अधिनियम के उपबंधों को अच्छी तरह नहीं समझा है। मैं उसे अच्छी तरह से समझ सकता हूँ यदि वे हिंदू संहिता विधेयक नहीं चाहते हैं तो वे उपबंधों को बेहूदा बताने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। परन्तु, मैं नहीं समझता कि यह सुझाव देना व्यवहार्य होगा कि हिंदू संहिता मुसलमानों, ईसाइयों, पारसियों, यहूदियों आदि पर लागू होना चाहिए।

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श्री आर. के. चौधरी : और सिद्धांत।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : मेरे माननीय दोस्त श्री चौधरी कहते हैं और मैं

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समझता हूँ कि वह फिर मेरी प्रशंसा करेंगे, जब मैं कहूँगा कि सिद्धांत लागू होते होंगे। मैं इस बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि पुराने हिंदू कानून के भी कुछ सिद्धांत, सार्वभौमिक स्वरूप के हैं और यह सभी परिस्थितियों में सभी धर्मों के लोगों पर लागू होते हैं। जहाँ तक उसका सवाल है, वह समान नागरिक संहिता का आधार होगा। अभी भी, हमारे वर्तमान कानून में कतिपय मूल तत्व हैं जो समान नागरिक संहिता, जैसे शारदा अधिनियम, बहुसंख्यक अधिनियम आदि के आधार हैं।

संविधान अधिनियम के अनुच्छेद 25 और 15 का उल्लेख किया गया था और अनुच्छेद 25 के कुछ प्रावधानों का उपहास तक किया गया था। मेरे माननीय मित्र श्री नजीरुद्दीन अहमद ने कहा कि वह ‘‘लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन’’ शब्दों का कोई अर्थ नहीं निकाल सके हैं तथा ये शब्द, अर्थहीन हैं। वे अर्थहीन नहीं हैं। उनके पूर्ण अर्थ नहीं हैं। केवल पूर्ण अर्थ ही नहीं बल्कि अति महत्वपूर्ण है। ऐसा लगता है कि वह अनुच्छेद 25 और 15 के महत्व को नहीं समझ पाये हैं। यह कहा गया था कि अनुच्छेद 15 के अंतर्गत कोई भेदभाव नहीं होगा और इसलिए हम हिंदू संहिता लागू नहीं कर सकते हैं, मुस्लिम संहिता तथा अन्य संहिता भी लागू नहीं कर सकते हैं। यही मेरा निवेदन है, यद्यपि मैं चाहूँगा कि पूरे