हिंदू कोड - जारी - Page 91

76 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

देश के लिए एक ही नागरिक संहिता होनी चाहिए, परन्तु हिंदू मुस्लिम संहिता और अन्य संहिता अपनाना संविधान अधिनियम के उपबंधों के अनुरूप नहीं है। मुझे यह कहते हुए खेद है कि मैंने उन माननीय मित्रों जो हिंदू संहिता विधेयक के पक्ष में हैं, को यह कहते हुए सुना है कि जहाँ तक अनुच्छेद 15 और 25 के उपबधों का प्रश्न है, हिंदू संहिता के प्रावधान इनके अनुरूप नहीं है। उदाहरणार्थ, मुझे खेद है कि मैंने स्वयं हिंदू संहिता विधेयक के प्रारुपकार को भी यह कहते हुए सुना है कि जहां तक संविधान का संबंध है, हिंदू संहिता में भाई-बहन अथवा पुरुष-महिला के बीच कोई भेदभाव नहीं हो सकता है।

डॉ. अम्बेडकर : केवल लिंग के आधार पर।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : मैं इस पर भी आ रहा हॅँ। एक तर्क यह भी दिया गया है कि लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं हो सकता है और संविधान का अनुच्छेद 15 हमारे रास्ते में आड़े आयेगा। एक अन्य सज्जन जो हिन्दू संहिता का विरोध करते हैं, भी अनुच्छेद 15 और 25 पर निर्भर हैं तथा कहते हैं कि इसमें कोई भी मतभेद नहीं हो सकता है। क्या मैं डॉ. अम्बेडकर से पूछ सकता हूँ कि यदि लिंग के आधार पर कोई मतभेद नहीं हो सकता है तो उन्होंने स्वयं हिंदू संहिता विधेयक में इतने प्रावधान क्यों रखे हैं जो लिंगों के बीच भेद करते हैं।

डॉ. अम्बेडकर : ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो लिंग के आधार पर ही भेद करता है।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : वह प्रावधान जिसमें 1/4 विवाहित पुत्री के लिए है तथा आधा भाग अविवाहिता पुत्री के लिए है। पुरुष की मृत्यु और महिला की मृत्यु की स्थिति में भिन्न उत्तराधिकार संबंधी प्रावधान क्यों हैं?

डॉ. अम्बेडकर : यह केवल लिंग के आधार पर नहीं है।

श्री त्यागी : मृत्यु के आधार पर भी है।

माननीय सभापति : मेरे विचार से प्रवर समिति की रिपोर्ट में ऐसा कोई भेदभाव नहीं है।

श्री के. सी. शर्मा. (उत्तर प्रदेश) : इस अनुच्छेद पर चर्चा नहीं हो रही है। वह अपने संशोधनों पर बोल सकते हैं।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : वास्तव में यह भेदभाव कि विवाहित पुत्री का पिता की सम्पत्ति में कोई हिस्सा नहीं हो सकता है। केवल लिंग पर ही आधारित नहीं है जैसा कि माननीय मित्र कहते हैं। मेरा निवेदन है कि हिंदू संहिता विधेयक में