हिंदू कोड - जारी - Page 92

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यह प्रावधान करना तर्कसंगत होगा कि यह विवाहित पुत्री अपने पिता की सम्पत्ति की उत्तराधिकारी नहीं होगी। मैं अभी डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रतिपादित तर्क पर बोल रहा था। भरण-पोषण किये जाने का अधिकार है। क्या पति को भी पत्नी द्वारा भरण-पोषण किये जाने का अधिकार है?

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श्रीमती रेणुका राय (पश्चिम बंगाल) : क्यों नहीं?

एक माननीय सदस्य : ऐसे कई उदाहरण हैं।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : मेरे माननीय मित्र पूछते हैं कि ‘‘क्यों नहीं?’’ मुझे प्रसन्नता है कि उन्होंने यह साहसिक दृष्टिकोण अपनाया है। क्या उन्होंने अपनी बहनों से पूछा है? हमारे सभापित ऐसा नहीं कहती हैं। मेरा निवेदन है कि यह सुझाव देना बिल्कुल गलत है कि समानता को लिंग के आधार पर इस तरह से लागू किया जाना चाहिए जो जीवन की कमियां शर्तों के अनुरूप न हो। मैं कहता हूँ कि यदि हम कहें कि एक विवाहित पुत्री अपने पिता की सहमति से उत्तराधिकारी नहीं होती है तो हिंदू संहिता किसी उपबंध का उल्लंघन नहीं करेगा। इसके विपरीत, वह अपने पति अथवा ससुर की सम्पत्ति की उत्तराधिकारी होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि जब तक हम महिलाओं के अधिकारों को मान्यता नहीं देते, जब तक हम उन्हें पूर्ण अधिकार नहीं देते, हम चरित्रबल में बहुत कुछ खो देंगे। यह चरित्र बल तभी बढ़ेगा यदि महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं। जब मैं विचार के चरण में बोल रहा था, मैंने यह कहा था तथा अब भी कह रहा हॅूँ कि हम उसके प्रति वचनबद्ध हैं और हमें अपनी बहनों को अधिकार देने चाहिएं। जिस तरीके से उन्हें अधिकार दिये जाते हैं, मैं उसी का विरोध कर रहा हूँ।

जहाँ तक पंजाब का प्रश्न है, मैंने निवेदन किया था कि हम इस सिद्धांत के पक्ष में हैं कि जब एक विवाहित पुत्री अपने पति के परिवार में जाती है तो वह उस परिवार का अंग बन जाती है और वह उस परिवार का केन्द्र बिन्दु बन जाती है। इसलिए, पंजाब के मामले में समस्या यह है कि पंजाबी संभवतः यह स्वीकार नहीं कर सकते हैं कि एक विवाहित पुत्री को अपने पिता की सम्पत्ति का उत्तराधिकारी होना चाहिए। जहाँ तक अन्य मूल तत्वों का संबंध है, हम अभी तक उन्हीं का पालन कर रहे हैं और जैसा कि मैंने कहा है कि ये मूल तत्व हिंदू संहिता के बजाए नागरिक संहिता के लिए बेहतर आधार होंगे। यह लिंग के आधार पर भेदभाव बिल्कुल नहीं है, बल्कि कतिपय जीवन दशाओं के कारण, यदि आप आज यह कानून पारित करते हो कि सभी पुरुषों को खाना बनाना चाहिए और महिलाओं को नहीं, क्या यह ठीक होगा? वह पूर्णतः गलत होगा।