हिंदू कोड - जारी - Page 95

80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के सभी तत्वों पर लागू होता है। इसलिए, मैंने अपने संशोधन में यह सुझाव दिया है कि यह संहिता ‘‘(क) उन सभी व्यक्तियों पर लागू होता है जो धर्म से हिंदू, बौद्ध, जैन अथवा सिख हैं।’’

अगला संशोधन एक नकारात्मक सुझाव के रूप में है, यह उन व्यक्तियों के बारे में कहना है जो इस संहिता से बंधे नहीं हैं। इसके अलावा, परम्परागत कानून और विशेष कानून भी हैं। उदाहरणार्थ, पंजाब के, मुसलमान कह सकते हैं वे परम्परागत कानून से नियंत्रित हैं न कि ‘सरीयत’ से। जो कानून मुसलमानों पर लागू होते हैं उनका इस संहिता में कोई उल्लेख नहीं है। ये परम्परायें सुरक्षित हैं। मेरा संशोधन कहता है कि यह :-

(ख) ‘‘अन्य किसी व्यक्ति जो मुसलमान, ईसाई, पारसी अथवा यहूदी न हो;’’

(ग) वह प्रत्येक महिला जो किसी व्यक्ति जो धर्म से मुसलमान, ईसाई, पारसी और यहूदी न हो; शादी की हो।

(घ) ‘‘वह वैध और अवैध बच्चा जिसके माता-पिता इस धारा के अर्थ के अंदर हिंदू हैं;’’ पर लागू होता है।

मैं निवेदन करता हूँ कि भाग ‘घ’ अनावश्यक है। जब हिंदू माता-पिता का वैध या अवैध बच्चा है तो इसका प्रश्न ही नहीं उठता है। बच्चा हिंदू हो जाता है। यह कहना गलत नहीं है कि बच्चा हिंदू है, बल्कि यह अनावश्यक है। एक हिंदू का बच्चा यथार्थ में हिंदू ही है। मैंने इस भाग को हटाकर यह प्रस्ताव किया है कि यह उस अवैध या वैध बच्चे पर भी लागू होना चाहिए जिसके माता-पिता धर्म से मुसलमान, ईसाई, पारसी अथवा यहूदी नहीं थे।

इस खंड के परन्तुक के संबंध में मैं कहता हूँ कि इसे संभवतः किसी अन्य प्रयोजनार्थ लाया गया था। यदि इसे शब्दशः ले लिया जाये तो यह उन व्यक्तियों को अलग कर देगा जिन्हें आप अलग नहीं करना चाहते हैं। यह सभी पंजाबियों को अलग कर देगा। इस परन्तुक की शब्द शैली काफी विस्तृत है। यदि इसे ऐसा ही रहने दिया जाये तो पंजाब उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 5 विवादित हो जायेगी। यह परन्तुक कहता है :-

‘‘बशर्तें यह सिद्ध हो जाता है कि यदि यह संहिता पारित नहीं होती तो ऐसा व्यक्ति यहाँ पर विचाराधीन किसी भी मामले में हिंदू कानून अथवा उस कानून के एक भाग के रूप में किसी अन्य प्रथा अथवा नीति से नहीं बंधा होता, उस स्थिति में यह संहिता उन मामलों में उस व्यक्ति पर लागू नहीं होगी।’’

इसका यह अर्थ है कि पंजाब के हिंदू इस संहिता से प्रभावित नहीं होंगे।