हिंदू कोड - जारी - Page 98

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किया जाता है। इसमें यहीं अंतर है। गोद लेने की प्रणाली के अंतर्गत गोद लिया गया पुत्र परिवार का नाम आगे बढ़ाता है, अपने पिता का नाम कायम रखता है। और इस तरह परिवार चलता रहता है, पंजाब में दूसरी तरह से परिवार चलता रहता है। वहाँ उत्तराधिकारी नियुक्त किया जाता है और वह परिवार का नाम आगे बढ़ाता है। इसलिए यह कहना सत्य नहीं है कि पंजाब में परम्परागत तरीके से उत्तराधिकारी नियुमा करता अथवा गोद लेना है। साथ ही, हिंदू कानून में यह नियम था कि उस महिला जो अपने पुत्र के पिता से विवाह नहीं कर सकी, उस पुत्र को गोद नहीं लिया जा सकता है और इसलिए, जहाँ तक गोद लेने का संबंध था, पुत्री के पुत्र के विरुद्ध किसी न किसी तरह का प्रतिबंध था।

अब हिंदू संहिता के प्रावधान के अंतर्गत यह जरूरी है कि गोद लेने के लिए कोई व्यक्ति विवाहित नहीं होना चाहिए तथा उसकी आयु 15 वर्ष से कम होनी चाहिए। ये बातें पंजाब में स्वीकार्य नहीं होंगी। यह प्रावधान पंजाब की इस परम्परा का अतिक्रमण होगा जिसके अंतर्गत आयु अथवा समारोह संबंधी अथवा अन्य प्रतिबंध नहीं है।

श्री त्यागी : क्योंकि पंजाब में पिता के लिए, पुत्र एक पुरुष है।

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पंडित ठाकुर दास भार्गव : सम्पूर्ण विश्व में बच्चा ही पुरुष का पिता है। पंजाब

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में भी उत्तराधिकारी चुनने की परम्परा है जो कि गोद लेने के समान है। मेरा कहना है कि डॉ. अम्बेडकर उन कानून पद्धतियों पर कृपावान रहे हैं जो दक्षिण में, उदाहरण् ार्थ मरूमक्काट्टयम, में प्रचलित है। संहिता को इस तरह से संतुलित करना चाहिए कि उनके लिए कोई बड़ी समस्या न हो। जो विवाह, गोद लेने आदि के संबंध में विभिन्न परम्परागत कानूनों का पालन करते हैं। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि उनकी पद्धतियां जारी रहें। कुछ मामलों में यह संहिता, हिंदू कानून की जड़ों तक जाती है। जहाँ तक वे लाभदायक हैं, हम उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार हैं, परन्तु, जहाँ तक उनमें व्यापक परिवर्तनों जो लोगों की धारणाओं से टकराते हैं, का संबंध है, मैं डॉ. अम्बेडकर से विनम्र निवेदन करूंगा कि जब भी वह बाद में दीर्घ के प्रावधानों पर विचार करेंगे, वह यह जरूर देखें कि उसमें हिंसक आचरण न हो। अपने तरीके से सबके सुझाव शामिल करने की कोशिश करेंगे तथा उन कतिपय संशोधनों को स्वीकार करेंगे जो मेरे द्वारा सुझाये गये संशोधनों के अनुरूप हैं।

जहाँ तक गोद लेने और विवाहित महिला के उत्तराधिकार का प्रश्न है, मैं कहना चाहूँगा कि इन दो मामलों में पंजाबियों की धारणा के साथ गहरा टकराव उत्पन्न हो जायेगा और वे हिंदू संहिता के प्रावधानों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होंगे। यदि इसे उन पर जबरदस्ती थोपा जाता है तो समाज में क्रांति आ जायेगीः मैंने पिछली बार कहा कहा था कि विद्रोह हो जायेगा; परन्तु विद्रोह नहीं होगा क्योंकि