15. भाग ‘ग’ राज्य (विधियाँ) विधेयक - Page 105

90 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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भाग-ग राज्य (विधि) विधेयक

ऽविधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः मैं कतिपय भाग-ग राज्यों में विधियों के विस्तार का उपबंध करने के लिए एक विधेयक पुरःस्थापित करने की इजाजत के लिए अनुरोध करना चाहता हूँ।

माननीय अध्यक्षः प्रश्न यह हैः

फ्कि कतिपय भाग-ग राज्यों में विधियों के विस्तार का उपबंध करने के लिए एक विधेयक पुरःस्थापित करने की इजाजत दी जाए।य्

प्रस्ताव अंगीकार किया गया।

डॉ. अम्बेडकरः मैं विधेयक पुरःस्थापित करता हूँ।

ऽऽविधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः मैं प्रस्ताव पेश करने की इजाजत चाहता हूँ।

फ्कि कतिपय भाग-ग राज्यों में विधियों के विस्तार का उपबंध करने के विधेयक पर विचार किया जाए।य्

कदाचित् यह आवश्यक है कि मैं सदन में कुछ स्पष्टीकरण प्रस्तुत करूँ कि इस विधेयक को क्यों कतिपय भाग-ग राज्यों तक सीमित रखा गया है। स्थिति यह है, कि हमारे पास संविधान की अनुसूची-1 में उल्लिखित कुल मिलाकर दस भाग-ग राज्य हैं। वे दस राज्य तीन समूहों के अंतर्गत हैं। कुर्ग, अजमेर और दिल्ली, जो मुख्य आयुक्तों के प्रांत थे अब भाग ‘ग’ राज्य के रूप में अभिहित हो गए हैं और जो संविधान से बहुत पहले अस्तित्व में आ गए थे। परिणामतः जहाँ तक इन तीन राज्यों का संबंध है, केन्द्रीय नियमों के विस्तार का प्रश्न ही नहीं उठता क्योंकि वे उसी समय लागू हो गए थे, जब वे अधिनियमित किए गए थे।

फिर भाग-ग राज्यों का दूसरा समूह है जो बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश, भोपाल और कच्छ हैं। उनके संबंध में गत वर्ष ही इस विधानमंडल ने केन्द्रीय अधिनियमों का विस्तार करने वाली एक विधि पारित की थी। यह विधेयक तीन भाग ‘ग’ राज्यों, अर्थात् विन्ध्य प्रदेश, त्रिपुरा और मणिपुर तक सीमित है। इस पर पृथक कार्यवाही की जाएगी क्योंकि वे 1949 का अधिनियम पारित होने के पश्चात् अस्तित्व में आए थे। परिणामस्वरूप, यह उपाय इन तीन भाग-ग राज्यों तक सीमित है। मैं यह उल्लेख कर दूँ, कि यद्यपि सभी विधियाँ, जिनका विस्तार भाग-ग राज्यों तक 1949 के अधिनियम द्वारा किया गया

ऽसं. वा., खंड 4, भाग II, 5 अप्रैल, 1950, पृष्ठ 2551

ऽऽसं. वा., खंड 4, भाग II, 11 अप्रैल, 1950, पृष्ठ 2777-84