91
था, विन्ध्य प्रदेश और त्रिपुरा को विस्तारित की गई है किंतु मणिपुर राज्य के संबंध में कुछ अपवाद किए गए हैं। सभी विधियाँ जो विन्ध्य प्रदेश या त्रिपुरा को पहले लागू की जा चुकी हैं या वर्तमान विधेयक द्वारा लागू की जाती हैं, स्वबल से मणिपुर को लागू नहीं की जाती हैं। यह कहा जाता है कि मणिपुर में अधिकतर ऐसे लोग आबाद हैं जिन्हें जनजाति कहा जाता है, जिनकी संस्कृति और जिनके रीति-रिवाज एवं जिनकी जीवन शैलियाँ उनसे पर्याप्त रूप से भिन्न हैं जो ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जिसे फ्स्थिर क्षेत्रय् कहा जाता है। परिणामस्वरूप, यदि सभी अधिनियमितियों का विस्तार मणिपुर तक किया जाता तो इससे बहुत विघ्न हो सकता था, इसीलिए एक अनुसूची जोड़ी गई है कि कौन-कौन-सी अधिनियमितियाँ मणिपुर को लागू नहीं होंगी। इसी प्रकार, हालांकि भारतीय दण्ड संहिता मणिपुर को लागू होती है, फिर भी इसकी दो धाराओं को कतिपय उपांतर के साथ लागू किया गया है।
आशा है कि सदन को इस विधेयक के संबंध में कुछ भी जटिल दिखाई नहीं देगा और वह उसे स्वीकार करेगा।
माननीय उपाध्यक्षः प्रस्ताव पेश किया जाता हैः
फ्कि कतिपय भाग ‘ग’ राज्यों में विधियों के विस्तार का उपबंध करने के विधेयक पर विचार किया जाए।य्
पंडित एम.बी. भार्गव (अजमेर)ः इस विधेयक के संबंध में मुझे कुछ कहना है। जहाँ तक किन्हीं केन्द्रीय विधियों का माननीय मंत्री द्वारा निर्दिष्ट राज्यों तक विस्तारित किए जाने का संबंध है, मुझे कुछ नहीं कहना है। किन्तु इसमें से एक खंड अर्थात् विधेयक का
खंड 2 है जिसमें यह अधिकथित है कि जिसमें राजपत्र में अधिसूचना द्वारा केन्द्रीय सरकार को स्वतंत्रता होगी कि वह किसी प्रांतीय अधिनियमिती का विस्तार भाग ‘ग’ के इन राज्यों में से किसी में भी अधिसूचना में अधिकथित उपांतर और निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, करे........। मुझे तनिक भी संदेह नहीं है कि यदि कभी इन सभी विस्तारित विधियों पर किसी सक्षम विधि प्राधिकारी के समक्ष प्रश्न उठाया जाएगा तो यह विधान न्यायिक न्यायालय की संवीक्षा पर खरा नहीं उतरेगा और इसे अकृत और शून्य घोषित कर दिया जाएगा। इसीलिए, मैं माननीय विधि मंत्री से सादर अनुरोध करूँगा कि इस विधान के संबंध में कोई अग्रिम कदम उठाने से पूर्व विधिक स्थिति पर विचार कर लें।
डॉ. अम्बेडकरः मुझे प्रसन्नता है कि मेरे माननीय मित्र ने यह प्रश्न उठाया। मैंने इस ओर ध्यान नहीं दिया था क्योंकि मेरा विचार था कि धारा इतनी साधारण है कि इसमें किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है, तथापि, अब जब प्रश्न उठाया गया है तो मेरे विचार में यह वांछनीय है कि मैं स्थिति को स्पष्ट कर दूँ। इस विशिष्ट खंड के गुणागुण का अध्ययन करने पर यह पता चलता है कि मामले में कतिपय ऐसे पहलू हैं