92 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जिन पर विचार किया जाना चाहिए। पहला यह है कि कुर्ग के अलावा अधिकतर भाग ‘ग’ राज्यों में कोई ऐसा विधानमंडल नहीं है जिसे ऐसी स्थानीय विधियाँ पारित करने का कर्तव्य सौंपा जा सके जो उनके स्थानीय प्रशासन के लिए आवश्यक हों। मेरे विचार में, यह भी समान रूप से स्पष्ट है और मेरे माननीय मित्र ने स्वयं स्वीकार किया है कि संसद के लिए एकमात्र अन्य विकल्प यह है कि वह यहाँ अधिवेशन करें और भाग ‘ग’ राज्यों के स्थानीय प्रशासन के लिए विस्तृत विधियाँ बनाएं और विचार किए जाने के लिए प्रश्न यह है कि क्या संसद के पास उपलब्ध समय को ध्यान में रखते हुएµऔर प्रत्येक व्यक्ति को ज्ञान है कि संसद के लिए केन्द्रीय प्रशासन के कार्यान्वयन के लिए कुछ बहुत आवश्यक उपायों का किया जाना भी कितना कठिन हैµसमय निकाला जाए और उसका उपयोग स्थानीय विधान के ब्यौरों पर अधिक सावधानी से विचार के लिए किया जाए। अतः अब हम दो कठिनाइयों के बीच में हैं_ एक यह है कि कोई स्थानीय विधानमंडल नहीं है और और दूसरी यह है कि संसद ऐसी स्थिति में नहीं है कि वह भाग ‘ग’ राज्यों की स्थानीय विधियाँ पारित करने में स्वयं को लगा ले। इस प्रकार की परिस्थिति में फिर क्या किया जाए? की जा सकने वाली बात केवल यह प्रतीत होती है कि भारत सरकार को, भाग ‘क’ राज्यों या अन्य भाग ‘ग’ राज्यों द्वारा बनाई कई कतिपय विधियों को ऐसे उपांतरों के साथ भाग ‘ग’ राज्यों को लागू किए जाने की शक्ति दी जाए जो स्थानीय परिस्थितियों और स्थानीय कठिनाई के कारण आवश्यक हों। मुझे नहीं लगता कि इसके अलावा भाग ‘ग’ राज्यों के लिए स्थानीय विधान प्रदान किए जाने का कोई अन्य मार्ग है। संसद के लिए, वास्तव में, किसी प्रक्रम पर यह संभव होगा कि वह भाग ‘ग’ राज्यों के लिए स्थानीय विधान परिषदें बनाए और इन स्थानीय विधानपरिषदों को अपने स्थानीय प्रशासन के लिए विधियां बनाने की शक्ति दी जाए, किन्तु जब तक संसद द्वारा ऐसा नहीं किया जाता, मुझे नहीं लगता कि तब तक अन्य कोई मध्य मार्ग उपलब्ध है, सिवाय उसके जो इस विशिष्ट विधेयक में सुझाव दिया गया है, और इसीलिए इस प्रश्न के अलवा कि क्या यह विधायी कारबार करने का समुचित ढंग है जिसे व्यावहारिक दृष्टिकोण से करने के लिए भाग ‘ग’ राज्य हकदार होंगे, मुझे कोई और तरीका प्रतीत नहीं होता।
मेरे मित्र ने आलोचना का एक यह बिन्दु प्रस्तुत किया है कि केन्द्र द्वारा इस शक्ति का प्रयोग भाग ‘ग’ राज्यों में विद्यमान स्थानीय सलाहकार निकायों से परामर्श किए बिना किया गया है। मुझे मामलों के उस पहलू के संबंध में अधिक जानकारी नहीं है क्योंकि जैसाकि मेरे मित्र परिचित होंगे, इस विशिष्ट मामले का प्रशासन गृह मंत्रालय का है और मुझे इसमें संदेह नहीं है कि गृह मंत्रालय इन निकायों से परामर्श करता है। यदि वे परामर्श नहीं करते हैं, तो मुझे इस पर संदेह नहीं है कि वे मेरे माननीय मित्र द्वारा दिए गए सुझाव को अपनाएंगे।