94 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय उपाध्यक्षः क्या संसद यह कहने के लिए स्वतंत्र है कि सरकार ऐसी विधियाँ पारित कर सकती हैं जो वह आवश्यक समझे?
डॉ. अम्बेडकरः वे यह कह सकते हैं कि सरकार के पास नियम बनाने की शक्ति है।
माननीय उपाध्यक्षः क्या वे सूची में निर्दिष्ट सभी मामलों के संबंध में कोई कोरा चैक दे सकते हैं?
डॉ अम्बेडकरः यह उचित रक्षोपाय के साथ ऐसा कर सकती है। कोई भी संसद कार्यपालिका को कोरा चैक नहीं देगीः निश्चित रूप से यह कार्यपालिका से खाली स्थान भरने के लिए कह सकती है और मैं नहीं समझता कि इस बाबत कोई कठिनाई हो सकती है।
श्री टी.टी. कृष्णमाचारी (मद्रास)ः जहाँ तक संविधान का संबंध है, प्रवर्तनशील अनुच्छेद केवल 240 और 242 हैं। हमने कुर्ग के संबंध में विशेष उपबंध किए हैं। जैसा कि श्रीमान जी, आप देखेंगे कुर्ग को सदन के समक्ष विशिष्ट विधेयक के प्रवर्तन से बाहर निकाल लिया गया है। जहाँ तक संविधान का संबंध है, इसमें इस बावत कोई विशिष्ट निदेश नहीं दिया गया है।। अतः इसे संसद की स्वेच्छा और कामना पर छोड़ दिया गया है। अपनाई जाने वाली कार्य प्रणाली ही मात्र ऐसी बात है जिस पर विवाद हो सकता है कि कार्य प्रणाली ऐसी हो कि ये सब अधिनियमितियाँ इस विधेयक के साथ सम्बद्ध अनुसूची का भाग बनें, ऐसी शक्तियों के साथ जो हम नियम आदि बनाने के लिए सामान्यतः प्रत्यायोजित विधान के नाम से ज्ञात साधन द्वारा कार्यपालिका को देते हैं अथवा वह प्रक्रिया हो जिसे अब अपनाया जाता है। जैसा कि विधि मंत्री ने उल्लेख किया है। इस प्रक्रिया को लम्बे समय से अपनाया जा रहा है और मैं सुनिश्चित नहीं हूँ कि संविधान में किसी प्रतिकूल, स्पष्ट अनुदेश के अभाव में किसी न्यायालय द्वारा इसे बातिल कैसे अभिनिर्धारित किया जा सकता है। जहाँ तक प्रत्यायोजित विधान का संबंध है, विश्व में किसी भी विधानमंडल द्वारा प्रत्यायोजन की ठीक मात्रा, प्रकृति और विस्तार को परिभाषित नहीं किया गया है। समय-समय पर इसमें परिवर्तन आता रहता है। जहाँ तक भाग ‘ग’ राज्यों का संबंध है, किसी ऐसे उपबंध के अभाव में, जो ऐसी किसी भी प्रकार की विधि को अधिनियमित करने से, जो संसद बनाना चाहे और ऐसी शक्तियों के केन्द्रीय सरकार को प्रत्यायोजन से जो यह देना चाहे स्पष्ट रूप से प्रतिबद्ध करे, इस सदन द्वारा पारित किए जाने में विधेयक के वर्तमान प्रक्रम पर कोई आपत्ति नहीं हो सकती।
माननीय उपाध्यक्षः साधारण विधियाँ किसी विधेयक में अधिनियमित की जाती हैं और ब्यौरा भरने तथा नियम बनाने के लिए शक्ति सरकार को दी जाती है।