96 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकरः संसद को पूर्ण शक्तियाँ प्राप्त हैं। वह उसे प्राप्त विधायी शक्तियों का प्रयोग किसी भी रूप में कर सकती है। वह इसका प्रयोग स्वयं कर सकती है या कतिपय परिस्थितियों में इसका उपयोग उसकी ओर से किए जाने के लिए किसी और से कह सकती है। इस पर किसी प्रकार का प्रतिषेध नहीं है।
श्री हुसैन इमाम (बिहार)ः मैं चाहता हूँ कि इस तथ्य पर कुछ प्रकाश डाला जाए कि यह ऐसी विचित्र स्थिति नहीं है जो अभी उत्पन्न हुई हो। चीफ कमिश्नरों के प्रांतों को केन्द्र द्वारा प्रशासित किया जाता है। हम अधिसूचना द्वारा चीफ़ कमिश्नर की शक्ति का विस्तार कर सकते हैं। जैसी कि पहले प्रथा थी या इसे विधान द्वारा किया जा सकता है, जैसा कि अब। किंतु प्रश्न यह है कि किसे सशक्त किया जाए? क्या हम कार्यपालिका को, न्यायपालिका को अथवा केन्द्रीय सरकार को सशक्त बनाने जा रहे हैं? शक्ति इन तीनों में वितरित नहीं की जानी चाहिये। खंड 3 का उपखंड (3) कहता हैः
फ्उल्लिखित ऐसे किसी अधिनियम या अध्यादेश को उक्त राज्यों में लागू करने सुकर बनाने के प्रयोजन से कोई न्यायालय या प्राधिकारी अधिनियम या अध्यादेश का निर्वचन, उसके सार को प्रभावित किए बिना ऐसे उपांतरणों के साथ कर सकेगा जो न्यायालय या अन्य प्राधिकारी के समक्ष मामले में उसे अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक या उचित हों।य्
इससे पता चलता है कि हमने अभी यह विनिश्चय नहीं किया है कि ये शक्तियां किसके पास रहेंगी। अंतरिम अवधि के दौरान केन्द्रीय सरकार को सशक्त बनाने की बात समझ में आ सकती है। प्राधिकारी कौन है..............
डॉ. अम्बेडकरः कोई भी प्राधिकारी। यह एक अनुकूलन हैः यह अंगीकरण नहीं है। हमने इस सदन में अनेक अनुकूलन विधियाँ पारित की हैं।
श्री हुसैन इमामः यह अनुकूलन केन्द्रीय प्राधिकारी या विधानमंडल द्वारा किया जाता है। यहाँ अनुकूलन को लोगों की अविनिर्दिष्ट संख्या के लिए छोड़ दिया गया है। प्राधिकारी को, इस विधान में कहीं भी परिभाषित नहीं किया गया है। क्या इसका अर्थ मुख्य आयुक्त है या मुख्य सचिव.........
डॉ. अम्बेडकरः जो भी विधि को प्रशासित करेगा वही इसे अनुकूल बनाएगा।
श्री हुसैन इमामः हम ऐसा कुछ कर रहे हैं जिस पर हमने उचित रूप से विचार नहीं किया है। विधेयक, सत्र में विलंब से पुनःस्थापित किया गया है। यह बेहतर होगा कि सरकार विधेयक को अभी वापस लेने और सत्र समाप्त होने के पश्चात् किसी प्रकार का अध्यादेश लाए यदि वे इस प्रकार का कुछ करना चाहते हैं। अन्यथा एक सुविचारित विधि प्रस्तुत की जाए जिसमें हर प्रकार की शक्ति दी गई हो। यही बेहतर है कि इस