97
प्रकार की कमियों वाले विधेयक के स्थान पर अध्यादेश लाया जाए। अतः मेरा माननीय मंत्री से अनुरोध है कि इस विषय पर पुनः विचार करें।
5.00 बजे अपराह्न
डॉ. अम्बेडकरः इस तथ्य की दृष्टि से कि मेरे माननीय मित्र इस उपाय को अध्यादेश के रूप में अधिनियमित किए जाने के लिए सरकार को अनुमति देने हेतु तैयार हैं_ इसका स्पष्ट अर्थ है कि इसके गुणागुण पर उन्हें अधिक आपत्ति नहीं है। अन्यथा, मुझे यह प्रतीत नहीं होता कि इस उपाय को अधिनियमित करने में उन्हें क्या आपत्ति है।
श्री हुसैन इमामः मेरा यह एक सुझाव मात्र था। यह अध्यादेश छह सप्ताह तक रह सकता है।
डॉ. अम्बेडकरः संसद के प्रारम्भ होने से।
श्री कामथ (मध्य प्रदेश)ः संसद का अगला सत्र प्रारम्भ होने के पश्चात् छह सप्ताह।
डॉ. अम्बेडकरः हम नहीं जानते कि क्या होगा। मैं नहीं बता सकता कि संसद का सत्र कब बुलाया जाएगा। अध्यादेश बनाने के पश्चात् हम अधर में नहीं लटकाना चाहते।
श्री कामथः वह कैसे हो सकता है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः यह सुझाव बहुत ही अव्यावहारिक सुझाव है।
इसके अलावा, जहाँ तक इस पहलू का संबंध है, जैसाकि मैं कह चुका हूँ, हमारे पास पूर्व उदाहरण है। दिल्ली के संबंध में हमारे पास समान विधि है। अजमेर-मेवाड़ के संबंध में हमारे पास ऐसी ही विधि अजमेर, मेवाड़ विस्तार अधिनियम, 1947 है। यदि ये दो नियम इतने बुरे नहीं हैं जैसाकि मेरे मित्र ने उन्हें चित्रित करने का प्रयास किया है, तो मैं यह नहीं समझ सकता कि इस उपाय के प्रति कोई आपत्ति क्यों की जाए। यदि समय होता तो हो सकता है सदन को मैं यह सुझाव देता कि बाद में हाउस आफ कॉमन्स द्वारा हाल ही में अपनाई गई प्रक्रिया को अपनाया जाए जिसमें ऐसे प्रत्यायोजित विधान की संवीक्षा करने के लिए सदन की एक स्थायी समिति है जो संसद को यह अवगत कराती है कि क्या प्रत्यायोजित विधान संसद के मूल आशय से आगे चला गया है या इससे विचलित हो गया है या किसी मूल सिद्धांत को प्रभावित करता है। मैं यह नहीं समझ पा रहा हूँ कि इतने लम्बे समय तक व्यवहार में रहने के पश्चात् कोई प्रत्यायोजित विधान पर आपत्ति कर सकता है।