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लोक प्रतिनिधित्व विधेयक
(माननीय अध्यक्ष पीठासीन)
ऽविधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः श्रीमन्, क्या मैं आपकी अनुमति से प्रस्ताव कर सकता हूँ जो आज के आदेश-पत्र में मेरे नाम है? मैं इस आज प्रातः नहीं कर पाया क्यों विधेयक की मुद्रित प्रतियाँ आज प्रातः उपलब्ध नहीं थीं। जैसाकि सदन के विधेयक की प्रतियों के बिना उसे पुरःस्थापित करने की इजाज़त देने में आपत्ति होती है, इसलिए मैंने सोचा कि मुझे प्रतीक्षा करनी चाहिए।
माननीय अध्यक्षः हाँ_ वे प्रस्ताव पेश कर सकते हैं। मुझे बताया गया था कि मामले पर विचार नहीं किया जाना है। मैंने उसे छोड़ दिया था।
डॉ. अम्बेडकरः क्योंकि, मैंने बताया था कि मुद्रित प्रतियाँ उपलब्ध नहीं हैं।
मैं लोक सभा और राज्यों के विधानमंडलों में स्थानों के आबंटन और उनके निर्वाचन के प्रयोजन के लिए निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन, ऐसे निर्वाचनों में मतदाताओं की अर्हताओं, निर्वाचक नामावालियों की तैयारी और उनसे संसक्त विषयों का उपबंध करने के लिए विधेयक पुरः स्थापित करने की अनुमति के लिए प्रस्ताव करना चाहता हूँ।
माननीय अध्यक्षः प्रश्न यह हैः
फ्कि लोक सभा और राज्यों के विधानमंडलों में स्थानों के आबंटन और उनके निर्वाचन के प्रयोजन के लिए निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन, ऐसे निर्वाचनों मे मतदाताओं की अर्हताओं, निर्वाचक नामावलियों की तैयारी और उनसे संबंधित विषयों का उपबंध करने के लिए विधेयक पुरःस्थापित करने की इजाजत दी जाए।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं विधेयक पुनःस्थापित करता हूँ।
लोक प्रतिनिधित्व विधेयक जारी....
ऽऽपरिवहन और रेल राज्य मंत्री (श्री सन्थानम)ः मैं प्रस्ताव पेश करने की इजाजत चाहता हूँः
फ्कि लोकसभा और राज्यों के विधानमंडलों में स्थानों के आबंटन और उनके
ऽसं. वा., खंड 4, भाग II, 12 अप्रैल, 1950, पृष्ठ 2797-98
ऽऽसं. वा., खंड 4, भाग II, 18 अप्रैल, 1950, पृष्ठ 3000-6