16. लोक प्रतिनिधित्व विधेयक - Page 122

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अन्य अनुच्छेदों का लागू होना राष्ट्रपति पर निर्भर करेगा जो कश्मीर सरकार से परामर्श करके शेष उपबंधों को ऐसे उपांतरणों और परिवर्तनों के साथ लागू कर सकेगा जो वह अवधारित करे। जैसा कि माननीय सदन को संभवतः ज्ञात होगा, कश्मीर के संबंध में पहले ही एक आदेश जारी किया जा चुका है जिसमें राष्ट्रपति ने संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले अनुच्छेद को यह कहते हुए उपांतरित दिया है कि वह कश्मीर सरकार से परामर्श करके कश्मीर के प्रतिनिधियों को नामनिर्दिष्ट करेंगे। मेरे विचार में, यह 26 जनवरी को जारी हुआ था। ऐसी स्थिति में, इस ससंद के पास वास्तव में कोई अधिकार नहीं है कि वह संसद में कश्मीर के प्रतिनिधित्व के संबंध में विधेयक में उपबंधित रीति से अलग रीति से कोई उपबंध करे। मेरे विचार में यह व्याख्या करने के लिए कुछ और कहना आवश्यक नहीं है कि प्रथम अनुसूची कैसे तैयार की गई।

अब मैं राज्य विधानसभाओं में कुल स्थानों के नियतन पर आता हूँ जैसाकि दूसरी अनुसूची में दिखाया गया है। इस विषय में संबंध में भी हमें अनुच्छेद 170 के उपबंधों के अनुरूप काम करना पड़ा है। उस अनुच्छेद में दो नियम अधिकथित किए गए हैं। एक नियम यह है कि प्रत्येक 75,000 की जनसंख्या पर एक से अधिक स्थान नहीं होने चाहिएं। दूसरा नियम यह है कि किसी राज्य विधानसभा के स्थानों की अधिकतम संख्या 500 और न्यूनतम 60 होगी। दूसरी अनुसूची बनाते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखा गया है। पहली विचारणा यह है कि किसी विधानसभा के स्थानों की कुल संख्या अनुचित रूप से अधिक न हो। दूसरी विचारणा यह है कि प्रत्येक राज्य विधानसभा के लिए नियत स्थानों की कुल संख्या संसद में राज्य कोटे का समाकल गुणज हो। इस दूसरे नियम को, कि एक दूसरे का समाकल गुणज हो, अपनाने का कारण यह है कि ऐसा करने से अनुच्छेद 55 के उपबंधों को क्रियान्वित करना आसान हो जाएगा। माननीय सदस्य इसकी सराहना करेंगे कि अनुच्छेद 55 ये उपबंध करता है कि इस तथ्य के होते हुए भी कि राज्यों में विभिन्न विधानसभाओं की कुल सदस्यता भिन्न हो सकती है, राष्ट्रपति के निर्वाचन में डाले गए मतों का मूल्यांकन समान होगा। अब यह बिल्कुल स्पष्ट है कि यह समान मूल्यांकन संगणना के लिए आसान हो जाएगा यदि किसी राज्य की विधानसभा में कुल स्थान, संसद में उस राज्य के स्थानों की संख्या का संपूर्ण गुणज हों। यहीं कारण है कि स्थानों का आबंटन तदनुसार किया गया है। बेशक, यह याद रखना होगा कि सभी मामलों में गुणज एक-समान नहीं हैं किन्तु गुणज है। दूसरी अनुसूची में स्थानों की संगणना इसी प्रकार की गई है।

श्री श्यामनन्दन सहायः इसीलिए, विभिन्न राज्यों में, राज्य विधानसभा के सदस्यों की संख्या अलग-अलग है। यह संसद के समान नहीं है जहाँ सदस्यों की संख्या नियत है।

डॉ. अम्बेडकरः जी हाँ, अधिकतम संख्या 500 है और न्यूनतम 60 है किन्तु विभिन्न राज्यों के लिए अलग-अलग संख्याएं नियत की जा सकती हैं। संविधान में इसके