16. लोक प्रतिनिधित्व विधेयक - Page 123

108 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

लिए कोई एकरूपता निर्धारित नहीं की गई है। हमारे पास व्यापक सीमा है जिसके भीतर हम विभिन्न राज्यों के लिए भिन्न-भिन्न संख्या नियत कर सकते हैं।

श्री श्यामनन्दन सहायः क्या हम जान सकते हैं कि विभिन्न राज्यों में आधार क्या है? जैसे-असम में प्रति स्थान 1,00,000 मतदाता_ बिहार में 1,10,000, उ.प्र. में 1,20,000 आदि।

डॉ अम्बेडकरः मेरा भाषण समाप्त होने के पश्चात् यदि यह बिन्दु आप स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें तो मैं इसकी व्याख्या कर सकूँगा। संसद और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के नियतन के लिए इतना ही पर्याप्त है।

अब मैं मतदाताओं के रजिस्ट्रीकरण पर आता हूँ। संसदीय निर्वाचन-क्षेत्रों और राज्य विधानसभा निर्वाचन-क्षेत्रों के लिए मतदाताओं के रजिस्ट्रीकरण हेतु अपनाए गए सिद्धांत एक-समान हैं। इनमें कोई अंतर नहीं है। परिणामस्वरूप, मेरे विचार में यही पर्याप्त होगा कि मैं संसदीय निर्वाचन-क्षेत्रों के मतदाताओं के रजिस्ट्रीकरण से संबंधित उपबंधों को स्पष्ट कर दूं। पहला सिद्धांत, जो विधेयक के खंड 15 में अधिकथित है, कहता है कि प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र की एक निर्वाचक नामावली होगी जिसके आधार पर निर्वाचन किया जाएगा। इसीलिए निर्वाचक नामावली तैयार करना अनिवार्य है और निर्वाचन के लिए पूर्व शर्त है। दूसरा सिद्धांत यह है कि निर्वाचक नामावली में रजिस्ट्रीकरण कराने के लिए किसी व्यक्ति को उन निरहर्ताओं से ग्रस्त नहीं होना चाहिए जिनका उल्लेख खंड 16 में किया गया है। वह ऐसा व्यक्ति न हो जो भारत का नागरिक नहीं है_ या ऐसा व्यक्ति जो विकृत चित्त हो या ऐसा व्यक्ति जो भ्रष्ट आचरणों से संबंधित अपराधों और निर्वाचन अपराधों का दोषी हो। तब वह उस निर्वाचन-क्षेत्र में नामंकित या रजिस्ट्रीकरण होने के लिए पात्र हो जाता है। अगला सिद्धांत यह है कि मतदाता का रजिस्ट्रीकरण केवल एक निर्वाचन-क्षेत्र में किया जा सकता है और एक से अधिक निर्वाचन-क्षेत्रों में नहीं। एक निर्वाचन-क्षेत्र में भी उसका रजिस्ट्रीकरण केवल एक बार हो सकता है। फिर, हमारे पास फ्रजिस्ट्रीकरण की शर्तेंय् के नाम से ज्ञात शर्तें हैं जो खंड 19 में अधिकथित की गई हैं। उनमें से एक यह है कि उसे फ्अर्हता अवधिय् के नाम से ज्ञात अवधि के दौरान कम से कम 180 दिनों तक मामूली तौर से भारत का निवासी होना चाहिए। दूसरे, अर्हता की तारीख को वह कम से कम इक्कीस वर्ष की आयु का होना चाहिए।

अब, अर्हता तारीख और अर्हता अवधि के संबंध में, मेरे विचार में यह आवश्यक है कि मैं स्थिति को और अधिक स्पष्ट करूँ। विधेयक को पढ़ कर सदन समझ जाएगा कि अर्हता अवधि और अर्हता तारीख के लिए वास्तव में दो अलग-अलग उपबंध हैं। पहली निर्वाचक नामावली के लिए एक अर्हता अवधि है और एक अर्हता तारीख है तथा परवर्ती निर्वाचक नामावलियों के लिए अर्हता अवधि और अर्हता तारीख हेतु एक अन्य उपबंध है।