16. लोक प्रतिनिधित्व विधेयक - Page 124

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अब, पहली निर्वाचक नामावली के लिए अर्हता अवधि 1 अप्रैल, 1947 से 31 मार्च, 1948 है। पहली निर्वाचक नामावली के लिए अर्हता तारीख 1 जनवरी, 1949 है। अब पहली निर्वाचक नामावली के लिए अर्हता अवधि और अर्हता तारीख के संबंध में मेरे द्वारा निर्दिष्ट ये उपबंध, वास्तव में हमारे नियंत्रण से बाहर हैं क्योंकि उन्हें संविधान सभा द्वारा नियत किया गया था जब उसमें यह संकल्प पारित किया गया था कि निर्वाचन, 1950 में एक नियत अवधि में होना चाहिए और आगे भी, और तदनुसार मतदाताओं के रजिस्ट्रीकरण और निर्वाचक नामावली बनाने की तैयारियां की जानी चाहिएं। अब तक, संविधान सभा द्व ारा पारित संकल्प के प्राधिकार के अधीन इतना अधिक कार्य किया जा चुका है कि हमारे लिए संविधान सभा द्वारा अधिकथित आधार में कोई परिवर्तन करना संभव नहीं है। किंतु परवर्ती निर्वाचक नामावली के संबंध में हमने कहा है कि अर्हता अवधि प्रत्येक वर्ष में 1 मार्च के ठीक पूर्व का कलैंडर वर्ष होगी और प्रत्येक वर्ष 1 मार्च अर्हता तारीख होगी।

अब, निवासीय अर्हता के संबंध में, जिसके बारे में, मैं जानता हूँ कि सदस्यों के मन में बहुत व्याकुलता होगी, मैं सदन का ध्यान विधेयक के खंड 20 की ओर आकर्षित करना चाहूँगा जिसमें फ्मामूल तौर से निवासीय् के नाम से ज्ञात पद को परिभाषित किया गया है। इस समय मैं मामले की अधिक चर्चा में नहीं पडूँगा, किन्तु यदि कोई प्रश्न उठाया जाता है तो मुझे उसको और स्पष्ट करने में प्रसन्नता होगी। इसी खंड में यह परिभाषित या विहित करने के लिए उपबंध किया गया है कि सशक्त सेनाओं में नियोजित किसी व्यक्ति विशेष का निर्वाचन-क्षेत्र क्या होगा।

मेरा ध्यान इस तथ्य की ओर आकर्षित किया गया है कि ऐसे व्यक्तियों के संबंध में कोई उपबंध नहीं किया गया है जिन्हें इस तथ्य के कारण अपने निवास-स्थान बदलने पड़ते हैं कि वे राज्य में सेवारत हैं और राज्य उनका स्थानांतरण स्थायी रूप से एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में कर देता है या उन्हें देश के बाहर भेज देता है। इस प्रकार के मामलों को सम्मिलित करने के लिए उपबंध किया जाना आवश्यक है और इस प्रकार के मामलों से निपटने के लिए मैं खंड 20 में एक उपखंड जोड़ने के लिए संशोधन का प्रस्ताव रखना चाहता हूँ।

अब, निर्वाचक नामावली तैयार करने के संबंध में एक अन्य उपबंध है जिसके प्रति मैं माननीय सदस्यों का ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा। पहला यह हैः कि वर्तमान नामावली, जो अब तैयार की जाएगा, 30 सितंबर, 1952 तक प्रचालन में रहेगी, अर्थात् यदि 30 सितंबर तक कोई निर्वाचन होता है तो निर्वाचक नामावली, जो अब तैयार की जाएगी, प्रचालन में समझी जाएगी, यद्यपि यह संभवतः पुरानी होगीµफिर भी इसमें कुछ नहीं किया जा सकता। तथापि, परवर्ती निर्वाचक नामावली प्रत्येक वर्ष तैयार की जाएगी और उसे खंड 23 तथा

खंड 24 में देखा जा सकता है। यह बिन्दु महत्वपूर्ण है, क्योंकि साधारणतया इस पर सहमति हो जाती है कि निर्वाचक नामावली अधिक पुरानी, उदाहरण के लिए यह निर्वाचन की तारीख से छह मास या तीन मास से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। अंग्रेजों की पुरानी