16. लोक प्रतिनिधित्व विधेयक - Page 127

112 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री आर.के. चौधरी (असम)ः विस्थापित व्यक्तियों के बारे में क्या है जो अब भारत में आ गए हैं?

डॉ. अम्बेडकरः यदि आप इस बिन्दु को उठा रहे हैं तो मैं अभी इसका उत्तर दूँगा। जैसाकि आप खंड 20(6) में देखेंगे, हमने यह उपबंध किया है कि कोई भी व्यक्ति, जो 25 जुलाई, 1949 के पूर्व भारत में आ गया है, उस निर्वाचन-क्षेत्र में जिसमें उस तारीख को रहता है, या किसी अन्य निर्वाचन-क्षेत्र में जिसे वह अपना निर्वाचन-क्षेत्र होना विनिर्दिष्ट करे, मतदाता के रूप में रजिस्ट्रीकृत किए जाने का हकदार होगा।

श्री त्यागी (उत्तर प्रदेश)ः उनके बारे में क्या उपबंध है जो अब 1950 में आ रहे हैं?

डॉ. अम्बेडकरः वह हम नहीं कर सकते, क्योंकि हमारे संविधान के अधीन मतदाता का नागरिक होना आवश्यक है और हमारा नागरिकता का खंड नागरिकता को प्रारम्भ होने की तारीख के रूप में परिभाषित करता है। जब तक हम इस स्थिति को नियमित करने के लिए नई नागरिकता विधि नहीं बना लेते, जो व्यक्ति उस तारीख के पश्चात् आए हैं, मुझे यह कहते हुए खेद है कि उन्हें मताधिकार प्राप्त नहीं होगा। इसमें हम कोई सहायता नहीं कर सकते।

ऽश्री एम.ए. अय्यंगरः ........अतः मेरा सुझाव है कि यद्यपि प्रवर समिति को निर्देश के लिए प्रस्ताव औपचारिक रूप में पेश नहीं किया गया है, तो हम एक मेज पर बैठें और सुझाए गए संशोधनों पर गुणागुण के आधार पर विचार करें और यदि आवश्यक हो तो उन्हें सम्मिलित कर लें। हम आज स्थगित करके कार्यवाही को कल जारी रख सकते हैं।

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः श्रीमन, क्या मैं कुछ बातों को स्पष्ट कर सकता हूँ? क्या मैं प्रवर समिति के बारे में इस बिन्दु पर विचार करने की चर्चा में दखल दे सकता हूँ?

माननीय अध्यक्षः जी हाँ, मेरी अनुपस्थिति में क्या घटित हुआ, मुझे उसकी जानकारी नहीं है, किन्तु जो कुछ माननीय उपाध्यक्ष ने कहा है और जो उन्होंने अभी कहा है उसे सुनकर मुझे पर्याप्त रूप से अच्छा बोध हो गया है।

अत, प्रवर समिति की माँग सराहनीय है जिसका केवल यह अर्थ है कि सभी विभिन्न उपबंधों के शांतिपूर्ण विचार-विमर्श के लिए एक गम्भीर और प्रबल अनुरोध वस्तुतः यही उसका आशय है।

ऽसं. वा., खंड 4, भाग II, 19 अप्रैल, 1950, पृष्ठ 3051