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माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः प्रवर समिति के लिए कोई प्रस्ताव नहीं है।
ऽऽश्री सन्थानम्ः प्रवर समिति काफ़ी बड़ी संख्या तीस या चालीस सदस्यों से बनाई जा सकती है जिनकी गहन रुचि हो और जो कतिपय संशोधनों पर जोर देना चाहते हों_ कल हम प्रवर समिति के प्रस्तावों पर चर्चा कर सकते हैं।
माननीय अध्यक्षः चाहे यह एक औपचारिक, तकनीकी, प्रवर समिति हो या तीस, चालीस या पचास सदस्यों की अनौपचारिक बैठक हो जो इस विषय में अपना पूर्ण प्रभाव रखना चाहते हैं, मैं मात्र यह कहना चाहता हूँ कि, जहाँ तक संभव हो, प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचार व्यक्त करने का और अपनी कठिनाइयों को बताने का, जो उसे महसूस हो रही हो, अवसर देना चाहिए। यदि यह हो जाए तो मेरे विचार में हमारा उद्देश्य पूरा हो जाएगा। मेरे विचार में, हम अभी स्थगित कर दें और कल लगभग 2.30 बजे मिलें।
डॉ. अम्बेडकरः श्रीमन्, मेरे विचार में, यह वांछनीय है कि मैं सदन को ठीक-ठाक यह बताऊँ कि प्रवर समिति क्या करने में समर्थ होगी और क्या करने में समर्थ नहीं होगी। मेरे विचार में सदन को अंधकार में रखकर किसी ऐसे प्रस्ताव पर सहमत होना मेरे लिए गलत होगा कि किसी प्रवर समिति द्वारा क्या किया जाना संभव है और क्या संभव नहीं है। मेरे विचार में मेरी टिप्पणियां सदन को भी यह विनिश्चित करने में समर्थ बनाएंगी कि क्या उन बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए, जो चर्चा के लिए उपलब्ध होंगे, किसी प्रवर समिति का होना वांछनीय है।
पहली बात जिसके बारे में, मैं पूर्णतया निश्चित हूँ, यह है कि प्रवर समिति, अर्हता अवधि और अर्हता तारीख से संबंधित उपबंधों का परिवर्तन नहीं कर पाएगी। मुझे पूरा विश्वास है कि यह कितना भी वांछनीय क्यों न हो, ऐसा किया जाना संभव नहीं होगा, जिसका स्पष्ट कारण यह है कि हमने वह निर्णय संविधान सभा में लिया था, जैसा कि इस सदन के प्रत्येक सदस्य को याद होगा कि निर्वाचन निश्चित समय पर होंगे और उस संकल्प के अधीन विभिन्न राज्यों को अपनी-अपनी निर्वाचक नामावलियाँ तैयार करने के निदेश दिए गए थे। सदन के अधिकतर सदस्यों ने निर्वाचक नामावलियों को तैयार करने के संबंध में विभिन्न राज्यों द्वारा की गई प्रगति को बताने वाले द स्टेट्समैन या द हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित विवरण को देखा होगा। विभिन्न राज्यों द्वारा तैयार की गई वे निर्वाचक नामावलियाँ अर्हता अवधि और अर्हता तारीख पर आधारित थीं।
प्रकट है, जब तक सदन इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचता कि निर्वाचक नामावलियाँ तैयार करने में विभिन्न राज्यों द्वारा किए गए श्रम को व्यर्थ होने दिया जाए (श्री सोंधीः यह कौन कहता है?) और हमें इस विधेयक में ऐसी अर्हता तारीख और अर्हता अवधि नियत
ऽऽसं. वा., खंड 4, भाग II, 19 अप्रैल, 1950, पृष्ठ 3052-54