16. लोक प्रतिनिधित्व विधेयक - Page 131

116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

यह एक अच्छा विचार है।) यदि सदन इसके लिए सहमत हो तो इस विधेयक को प्रवर समिति को निर्दिष्ट किए जाने की कोई आवश्यकता ही नहीं है। अब, श्रीमन्, जो दूसरा बिन्दु विधेयक में शेष रहता है वह यह है। मैं नहीं समझता कि मैं यह कहकर किसी पर आरोप लगा रहा हूँ कि जो मैं करता हूँ, अर्थात् गरमी अैर तीव्रता का अधिकांश भाग और उत्पन्न सामान्य सत्याभासी तर्क बहुत ही लघु बिन्दु को समाविष्ट करने के लिए उद्दिष्ट हैं, अर्थात् अधिकतर माननीय सदस्य राज्य विधानमंडलों में स्थानों की संख्या में वृद्धि किए जाने के पक्ष में हैं, किन्तु यह कहने का साहस उनमें से एक या दो को छोड़कर, किसी में नहीं है। यदि माननीय सदस्य की रुचि मात्र इस लघु बिन्दु में है कि यू.पी. के लिए संख्या में 15 की या मैसूर के लिए एक की वृद्धि की जाए या दिल्ली के लिए दो की ही वृद्धि की जाए, तो मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या यह ऐसा विषय नहीं है जिस पर हम इसी सदन में विचार कर सकते हैं? किसी प्रवर समिति के साथ परेशान क्यों हों?

श्री भट्टः आप सभी ब्यौरों पर विचार नहीं कर सकते।

डॉ. अम्बेडकरः कोई ब्यौरे नहीं हैं। मैं स्वयं, विभिन्न राज्यों के कुल प्रतिनिधित्व में आंकड़ों का परिवर्तन करने के लिए कतिपय संशोधनों का प्रस्ताव कर रहा हूँ। यदि मेरे माननीय मित्र यह सोचते हैं कि मैं बहुत कंजूस और संकीर्ण हूँ और मैं उनकी माँगें पूरी नहीं कर रहा हूँ तो ठीक है, वे अभी संशोधनों को प्रस्तावित कर सकते हैं और सदन यह विनिश्चत कर सकेगा कि क्या मेरे द्वारा सुझाए गए आँकड़े ठीक है अथवा वे आँकड़े ठीक हैं जो उनके द्वारा सुझाए गए हैं। इसे प्रवर समिति में क्यों भेजा जाए? मैं यह जानना चाहता हूँ कि इस विधेयक में और कौन-सी बात है जिसपर प्रवर समिति विचार कर सके? यह एक सामान्य विधेयक है।

मेरे माननीय मित्र श्री हुसैन इमाम ने कहा था कि कुछ ऐसे विषय हैं जिन्हें विधेयक में सम्मिलित नहीं किया गया है। मेरा विचार है कि वे भूल गए कि मैंने इस विधेयक के पुरःस्थापन पर अपनी मताभि व्यक्तियों में क्या कहा था। तब मैंने बताया था कि वह विधेयक निर्वाचन के केवल एक पहलू से संबंधित है। निर्वाचन का संचालन बिल्कुल भिन्न विषय है और उस पर एक अन्य विधेयक में विचार किया जाएगा। परिणामतः वे सभी विषय जो यहाँ अनुपस्थित प्रतीत होते हैं_ अनुपस्थित नहीं रहेंगे क्योंकि जब तक विधान का अनुपूरक भाग भी पारित नहीं हो जाता, निर्वाचन पूरे नहीं किए जा सकते और न ही उन्हें आयोजित किया जा सकता है। अतः मेरा निवेदन है कि यद्यपि कोई प्रस्ताव पेश नहीं किया गया हैµऔर आपने कहा था कि यदि जरूरत हो तो प्रस्ताव सृजित किया जा सकता हैµबिल्कुल सच कहा था, यह सृजित हो सकता हैµकिंतु क्या इसकी कोई आवश्यकता है? यह वह बिन्दु है जिस पर, मैं चाहता हूँ कि सदन विचार करे। ये तीन बिन्दु हैं और मेरे पास संशोधन तैयार हैं।