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लोक प्रतिनिधित्व विधेयक.....समापन
ऽमाननीय अध्यक्षः सदन, कल निम्नलिखित प्रस्ताव पर विचार कर रहा थाः
फ्कि लोक सभा और राज्यों के विधानमंडलों के लिए स्थानों के आबंटन और उनके निर्वाचनों के प्रयोजन के लिए, निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन, ऐसे निर्वाचनों में मतदाताओं की अर्हताओं, निर्वाचक नामावलियाँ तैयार करने और उनसे संबंधित विषयों का उपबंध करने के लिए विधेयक पर विचार किया जाए।य्
श्री श्याम सुन्दर सहायः ........अब जबकि विधि मंत्री यहां है, मैं आशा करता हूँ कि वे आपके सामने आज प्रातः यथा प्रकटित तथ्य रखेंगे और तब हम विधेयक पर
खंड प्रति खंड विचार करेंगे।
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर)ः श्रीमन्, मुझे विलंब से आने का खेद है। आपके सुझाव पर आज प्रातः उपाध्यक्ष महोदय की अध्यक्षता में सदन के ऐसे सदस्यों की बैठक आयोजित की गई थी जो विधेयक में दिलचस्पी रखते हैं और मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता हो रही है कि हमने इस विधेयक के कतिपय संशोधनों को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है जिन्हें मैं आपकी अनुमति से प्रस्तुत करना चाहता हूँ। मैं आशा करता हूँ कि इस विषय पर आगे कोई या संविवाद वाद-विवाद नहीं होगा।
श्री त्यागी (उत्तर प्रदेश)ः मेरा समाधान नहीं किया गया। मैं संशोधनों से सहमत हूँ किंतु मेरी शंकाओं का समाधान नहीं किया गया तथा मेरा संशोधन स्वीकार नहीं किया गया। इसलिए यह सर्वसम्मत नहीं था।
माननीय अध्यक्षः जो भी कारण रहे हो, निष्कर्ष सर्वसम्मत प्रतीत होता है, मैं सदन के समक्ष विचार करने के लिए प्रस्ताव रखूँगा और तब हम खंड प्रति खंड विधेयक पर विचार कर सकते हैं। मैं इस सुखद निष्कर्ष पर सदस्यों को बधाई देता हूँ। प्रश्न यह हैः
फ्कि लोक सभा और राज्यों के विधानमंडलों के लिए स्थानों के आबंटन, और उनके निर्वाचनों के प्रयोजन के लिए निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन, ऐसे निर्वाचनों में मतदाताओं की अर्हताओं, निर्वाचन नामावलियाँ तैयार करने और उनसे संबंधित विषयों का उपबंध करने के विधेयक पर विचार किया जाए।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
माननीय अध्यक्षः हम, अब विधेयक पर खंड-प्रति-खंड विचार कर सकते हैं।
ऽसं. वा., खंड4, भाग II, 30 अप्रैल, 1950, पृष्ठ 3057-58