16. लोक प्रतिनिधित्व विधेयक - Page 136

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से अवगत हूँ। जहाँ तक मैं समझता हूँ, सदस्य केवल इस बारे में उत्सुक हैं कि किसी निर्वाचन-क्षेत्र के तय किए जाने या परिसीमन को प्रभावी बनाए जाने से पूर्व, इस सदन को इसकी परीक्षा करने और उस पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर मिलना चाहिए_ क्योंकि इन सब निर्वाचन-क्षेत्रों को किसी अधिनियम के परिशिष्ट या अनुसूची के रूप में उल्लिखित करना संभव नहीं है, जिसे सदन पारित कर सके। जैसाकि श्री कृष्णमाचारी ने ठीक इंगित किया है, विधि से केवल इतना करने की अपेक्षा की जा सकती है कि वह अमुक-अमुक बात के लिए फ्उपबंधय् बनाए। इसका यही अर्थ नहीं है कि सभी ब्यौरे यहाँ सदन में नियत किए जाएँ। सदन विधिक मशीनरी विहित कर सकता है, जिसके द्वारा कोई चीज की जा सके। मेरी कठिनाई यह है कि मैं पूर्ण रूप से उनका दृष्टिकोण समझने में असमर्थ हूँ जो आपत्ति करते हैं। सदन का उद्देश्य अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान करना प्रतीत होता है। आखिर, कोई भी विधेयक भले ही वह माननीय सदस्य द्वारा सुझाई गई रीति में सदन में लाया गया हो, कार्यपालिका द्वारा ही बनाया जाएगा और एक तैयार तथा चुस्त-दुरूस्त रूप में आएगा। मुझे पता है कि डॉ. अम्बेडकर खंड 13 में संशोधन प्रस्तावित करना चाहते हैं और माननीय सदस्य देखेंगे कि उस संशोधन के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा जो भी किया जाएगा वह ऐसे उपांतरण् ों के अधीन होगा जो संसद उसमें करना चाहे। अतः यह स्पष्ट है कि जो भी आदेश दिए जाते हैं, पुनः संवीक्षा के लिए सदन के समक्ष आएँगे और संसद को उपांतरणों के संबंध में सुझाव देने का कानूनी अधिकार होगा। यह मामला ऐसा नहीं होगा जिसके लिए सरकार अपनी सुविधा के अनुसार समय निकाले या न निकाले। यदि किसी सदस्य द्वारा उपांतरण के लिए सुझाव दिया जाता है तो वह उपांतरण सदन के समक्ष अवश्य आना चाहिए और सरकार को इसके लिए समय अवश्य निकालना चाहिए।

डॉ. अम्बेडकरः श्रीमन्, यदि आप मुझे अनुमति दें तो मैं एक कदम और आगे जाना चाहता हूँ। संसद बिल्कुल अंत में इसकी तथाकथित शव परीक्षा नहीं कर सकती, किन्तु जो मैं कह रहा हूँ वह यह है कि मैं एक विधेयक प्रस्तुत करूँगा जिसमें विधि द्वारा इन सभी विषयों को निपटाया जाएगा और संसद को इस पर अपनी राय व्यक्त करने का अवसर मिलेगा। यह बहुत बड़ा अवसर है जिसे मैं प्रस्तावित कर रहा हूँ। इस विषय पर उचित और पूर्ण रूप से विचार करके मैं स्वयं को किसी एक पक्ष की ओर जोड़ने की स्थिति में नहीं हूँ। किन्तु निर्वाचकों की पद्धति कुछ भी हो, मतदान का आधार कुछ भी हो, अभ्यर्थियों की अर्हताएं या निरहताएँ कुछ भी हों, इन सभी विषयों से एक विधेयक द्वारा निपटा जाएगा। जिसे सरकार खंड 5 और खंड 6 के प्रवर्तन में आने से बहुत पहले लाएगी........

माननीय अध्यक्षः इसके अलावा में भी यह इंगित कर रहा था कि चूंकि सदन को यह अधिकार प्राप्त है.......