126 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकरः श्रीमन्, चर्चा को संक्षिप्त करने के लिए मैं यह बताना चाहता हूँ कि यह ऐसा विषय है कि जिस पर अधिक समुचित रूप में इस सदन में बाद में लाए जाने वाले विधेयक के समय विचार किया जा सकता है। मैं नहीं समझता कि यह विषय इस विशिष्ट विधेयक से सुसंगत है।
श्री त्यागीः किंतु ग्रामीण क्षेत्र को शहरी क्षेत्रों के साथ मिलाकर निर्वाचक नामावलियाँ बनाए जाने के पश्चात् मेरे द्वारा उठाए गए इस बिन्दु का कोई महत्त्व नहीं रह जाएगा।
अन्य माननीय सदस्यों के संशोधनों के विषय में माननीय डॉ. अम्बेडकर ने ऐसा आश्वासन दिया है कि उन पर विचार किया जाएगाµकिन्तु मेरे संशोधन का वे विरोध करते रहे हैं। गत दो दिनों से मैं भरसक प्रयास कर रहा हूँ कि मैं उन्हें अपने विचार-बिन्दु से आश्वस्त कर सकूँ, किन्तु वे मुझे सहानुभूतिपूर्वक नहीं सुन रहे हैं।
माननीय अध्यक्षः किन्तु इस बार उन्होंने यह कहकर पर्याप्त सहानुभूति व्यक्त की है कि इस विषय पर उस समय विचार किया जा सकता है जब अगले विधेयक पर विचार किया जाएगा।
ऽखंड 10
खंड 10 विधेयक में जोड़ा गया
खंड 11
(परिषद निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन)
संशोधन किया गयाः
फ्‘निर्वाचन आयोग से परामर्श करने के पश्चात्’ का लोप किया जाए।य्
µ(डॉ. अम्बेडकर)
यथा संशोधित खंड विधेयक में जोड़ा गया।
खंड 12
(आदेशों को परिवर्तित या संशोधित करने की शक्ति)
श्री श्यामनन्दन सहायः मुझे इस खंड की आवश्यकता समझ में नहीं आती क्योंकि यह इन सब समितियों से ऊपर राष्ट्रपति को, निर्वाचन आयोग से परामर्श करने के पश्चात् हर तरह का परिवर्तन कने की शक्ति देता है। मैं स्थिति को समझना चाहता हूँ। यह उसके विपरीत है जिस पर सहमति हुई थी।
ऽसं. वा., खंड 4, भाग II, 20 अप्रैल, 1950, पृष्ठ 3072-74