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माननीय अध्यक्षः शायद विचार यह है कि राष्ट्रपति में, समय-समय पर अपने स्वयं के आदेशों को पुनरीक्षित करने की शक्ति निहित की जाए।
डॉ. अम्बेडकरः संसद द्वारा आदेशों को अंतिम रूप दिए जाने के पश्चात् उनमें कोई संशोधन नहीं किया जाएगा।
माननीय अध्यक्षः किंतु क्या फ्निर्वाचन आयोग से परामर्श करने के पश्चात्य् शब्द आवश्यक है?
डॉ. अम्बेडकरः यह संसद द्वारा अंतिम रूप दिए जाने से पूर्व के लिए है।
श्री श्यामनन्दन सहायः यह सलाहकार समिति तो होगी। सलाहकार समिति और निर्वाचन आयोग संयुक्त रूप से विशिष्ट प्रस्ताव राष्ट्रपति को भजेंगे। राष्ट्रपति इसे स्वीकार करता है तथा खंड 6, 9 या 11 के अधीन आदेश पारित करता है। इसके पश्चात् निर्वाचन कराए जाते हैं।
डॉ. अम्बेडकरः इसके पश्चात् आदेश संसद के समक्ष रखा जाता है। सिफारिश सलाहकार समिति द्वारा राष्ट्रपति को की जाती है। राष्ट्रपति कोई ओदश दे सकता है। इसके पश्चात् वह आदेश संसद के समक्ष रखा जाता है। एक निलंबित अवधि होती है। इस अवधि के दौरान यदि राष्ट्रपति को लगता है कि संभवतः आदेश में कोई गलती हो गई है तो उसे आदेश में परिवर्तन या संशोधन करने की शक्ति होनी चाहिए।
माननीय अध्यक्षः अतः इस शक्ति का विस्तार, सदन द्वारा अनुमोदन किए जाने के बाद परिवर्तन करने के लिए नहीं होगा। तब यह अंतिम है।
खंड विधयेक में जोड़ा गया।
खंड 13
(संसद के समक्ष रखे जाने वाले आदेश)
डॉ. अम्बेडकरः मैं प्रस्ताव पेश करने की इजाजत चाहता हूँः
वर्तमान खंड के स्थान पर निम्नलिखित रखेंµ
फ्13 धारा 6, 9 और 11 के अधीन आदेश करने की प्रक्रियाµ
(1) इस अधिनियम के प्रारम्भ के पश्चात् यथा शीघ्र अध्यक्ष द्वाराµ
(क) प्रत्येक भाग ‘क’ राज्य और जम्मू और कश्मीर को छोड़कर भाग ‘ख’ राज्य के संबंध में, उस राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले न्यूनतम तीन और अधिकतम सात संसद सदस्यों की बनी एक सलाहकार समिति_ और