129
ऽश्रीरामलिंगम चैट्टियार (मद्रास)ः मुझे खंड 12 और खंड 13 के बीच तनिक संदेह है। खंड 12 कहता है कि राष्ट्रपति अपने पहले से पारित आदेश को परिवर्तित कर सकेगा। खंड 13 कहता है कि इसे संसद द्वारा उपांतरित किया जा सकेगा। अंतराल में क्या होगा? क्या राष्ट्रपति द्वारा पारित आदेश प्रभावी होगा या यह मात्र अनंतिम होगा।
डॉ. अम्बेडकरः यह अनंतिम है, क्योंकि अंतिम प्राधिकार संसद के पास है।
श्री रामलिंगम चैट्टियारः आप ऐसा न कहें। यथा विद्यमान धारा का कहना है कि यह उपांतरणों के अधीन रहते हुए अंतिम िदेश है, न कि यह कि यह अतंतिम आदेश है। आदेश पारित किए जाने के तुरंत पश्चात् प्रभावी हो जाता है। बाद में इसे संसद द्वारा उपांतरित किया जा सकेगा।
डॉ. अम्बेडकरः यह इस दृष्टि से अनंतिम आदेश है कि यदि बाद में संसद इसे उपांतरित नहीं करती है तो यह प्रभावी हो जाता है। किन्तु अधिनियमित करने की अंतिम शक्ति वास्तव में, संसद के ही पास है।
पंडित ठाकुर दास भार्गवः मेरे माननीय मित्र श्री कामथ द्वारा उठाया गया बिन्दु यह था कि वास्तव में, संविधान के अनुसार निर्वाचन आयुक्त में कतिपय शक्तियाँ निहित हैं और ये शक्तियाँ निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन के बारे में हैं। निर्वाचन-क्षेत्रों को परिसीमित करने का विशेषाधिकार केवल संसद को है। अब निर्वाचन आयुक्त की स्थिति, समिति की स्थिति से भी अधिक बेहतर है। वह केवल उससे परामर्श करेगा और उसे प्रस्ताव बनाने का अधिकार प्राप्त है।
डॉ अम्बेडकरः यह वही बिन्दु है जिसे पहले भी उठाया गया था। जब हमने
खंड 6 पर चर्चा की थी, वैसा ही बिन्दु उठाया गया था और माननीय विधि मंत्री ने तभी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। अंततः यह संसद ही इस शक्ति का प्रयोग करेगी।
डॉ. अम्बेडकरः ये सब प्रारंभिक चरण हैं। यहाँ तक कि राष्ट्रपति का आदेश भी प्रारम्भिक चरण है।
माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य संशोधन में फ्निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन के संबंध में प्रस्ताव तैयार करनाय् शब्द देखेंगे। उन्हें अवधारित करने की शक्तियां नहीं दी गई हैं। याद रखने वाली एक अन्य बात यह है कि यह संसद ही है जो परिसीमन संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा और उनकी परीक्षा करेगी।
ऽसं. वा., खंड 4, भाग II, 20 अप्रैल, 1950, पृष्ठ 3974-75