16. लोक प्रतिनिधित्व विधेयक - Page 145

130 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ऽडॉ. देशमुखः ........... आप ऐसी कोई भी प्रक्रिया अधिकथित कर सकते हैं जिसके द्वारा समितियाँ निर्वाचित हो सकें। किन्तु जहाँ तक इन व्यक्तियों का संबंध है, निर्वाचन का कुछ तत्त्व तो होना ही चाहिए। अध्यक्ष को एक ऐसा निकाय बनाने का उत्तरदायित्व नहीं देना चाहिए जो निर्वाचन-क्षेत्रों को अवधारित करेगा।

माननीय अध्यक्षः क्या मैं माननीय विधि मंत्री की प्रतिक्रिया जान सकता हूँ?

डॉ. अम्बेडकरः मैं इसमें से कोई भी संशोधन स्वीकार नहीं कर सकता।

सरदार बी.एस मानः श्रीमन्, मेरे संशोधन का क्या हुआ? माननीय मंत्री की क्या प्रतिक्रिया है?

डॉ. अम्बेडकरः मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता।

सरदार बी.एस. मानः तब मैं इसे प्रस्तावित नहीं कर रहा हूँ।

खंड 20

(‘मामूली तौर पर निवासी’ का अर्थ)

ऽऽडॉ अम्बेडकरः मैं प्रस्ताव पेश करने की इजाजत चाहता हूँः

उपखंड (3) के पश्चात्, यह अंतः स्थापित करेंः

फ्(4) भारत में किसी पद को, जो राष्ट्रपति द्वारा निर्वाचन आयोग के परामर्श से ऐसे पद के रूप में घोषित किया गया हो जिस पर उपखंड के उपबंध लागू होते हों, धारित करने वाला कोई व्यक्ति था। भारत के बाहर किसी पद पर भारत सरकार के अधीन नियोजित कोई व्यक्ति, उस निर्वाचन-क्षेत्र में, जिसमें यदि उसने वह पद या नियोजन धारित न किया होता तो किसी अवधि के दौरान या किसी तारीख को, जिसमें वह उस अवधि के दौरान या उस तारीख को मामूली तौर पर निवासी रहा है, मामूली तौर पर निवासी समझा जाएगा।य्

और परवर्ती उपखंड पुनः संख्यांकित किए जाएंगे।

उपखंड (5) के रूप में पुनः संख्यांकित उपखंड (4) में,µ

( i ) फ्उपखण्ड (3)य् के पश्चात् फ्या उपखण्ड (4)य् अंत स्थापित करें_ और

( ii ) फ्सशस्त्र बलोंय् के पश्चात् फ्यदि उसने ऐसा कोई पर धारण न किया होता अथवा ऐसे किसी पद पर नियोजित न होता जो उपखंड (4) में निर्दिष्ट हैय् अंतः स्थापित करें।

ऽसं. वा., खंड 4, भाग II, 20 अप्रैल, 1950, पृष्ठ 3076-77

* ऽसं. वा., खंड 4, भाग II, 20 अप्रैल, 1950, पृष्ठ 3081-82