16. लोक प्रतिनिधित्व विधेयक - Page 146

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उपखंड (6) के रूप में पुनः संख्यांकित उपखंड (5) में,µ

( i ) फ्उपखंड (3)य् के पश्चात् ‘‘या उपखंड (4)’’ अंतः स्थापित करें_ और

( ii ) फ्उपखंड (4)’’ के स्थान पर ‘‘उपखंड (5)य् रखें।

यह संशोधन खंड 20 में आने वाले पद फ्मामूली तौर पर निवासीय् के लागू होने के संबंध में व्यक्त कुछ संदेहों को दूर करने के प्रयोजन से किया गया है। यह ऐसे कतिपय व्यक्तियों को लागू होता है जिन्होंने अस्थायी रूप से अपने मामूली निवास का स्थान छोड़ दिया हो और कहीं और रहने के लिए चले गए हों। यह आवश्यक समझा गया है कि ऐसा कुछ उपबंध इस खंड में किया जाना चाहिए। यह ऐसे व्यक्तियों के प्रति निर्देश करता है जो शासकीय डयूटी पर अस्थाई रूप से भारत के बाहर भेजे जाते हैं जिनके विषय में यह माना जाता है कि अब वे अपने मामूली निवास के स्थान पर नहीं रह रहे हैं। उनके मामले में इस प्रकार की उपधारणा किए जाने को निवारित करने और उस निर्वाचन-क्षेत्र में, जिसमें वे मामूली तौर पर रहते रहे हैं, रजिस्ट्रीकृत किए जाने के उनके अधिकार को बनाए रखने के लिए यह उपबंध किया गया है।

इसी प्रकार यह उपबंध मंत्रियों के मामले मे लागू किया जाना उद्दिष्ट है। उदाहरण के लिए केन्द्र में, जिन्होंने राज्य के अधीन कतिपय पद स्वीकार कर लिए हैं, उनके बारे में यह उपधारणा रहेगी कि वे अपनी पदावधि के दौरान जो स्वयं संसद के कार्यकाल की सहविस्तारी हो सकती है, अर्थात् पांच वर्षों तक यहाँ रहेंगे। यहाँ भी यह उपधारणा की जा सकती है कि उन्होंने उस स्थान पर निवास करना छोड़ दिया है जहाँ वे मामूली तौर पर रहे हैं। ऐसे मामलों को सम्मिलित किए जाने के लिए भी यह महसूस किया गया कि ऐसा उपबंध आवश्यक है।

मुझे यह सुझाव भी दिया गया था कि संसद सदस्य, जो कि मंत्री आदि जैसे पदधारियों से भिन्न हैं, अन्य उपधारणा से प्रभावित हो सकते हैं, अर्थात् चूँकि वे प्रायः यहाँ आते रहते हैं, उनके बारे में भी माना जा सकता है कि वे उस स्थान पर नहीं रहते जहाँ के वे मामूली तौर पर से निवासी हैं। किंतु सलाह करने पर मैं यह महसूस करता हूँ कि यह उपधारणा इस कारण उन्हें लागू नहीं की जा सकती कि जब कोई व्यक्ति अस्थाई रूप से किसी विशिष्ट कारण के लिए अपने मामूली निवास-स्थान को छोड़ता है और कहीं और चला जाता है तो विधि में यह उपधारणा नहीं की जा सकती कि उसने अपने निवास के मूल स्थान पर वापस आने का अपना आशय व्यक्त कर दिया है। परिणामस्वरूप, मैं नहीं समझता कि संसद सदस्यों के संबंध में वह उपबंध आवश्यक है। अन्य दो मामलों में ऐसा प्रतीत होता है कि यह आवश्यक हो सकता है और पूर्वावधानता के उपाय के तौर पर मैं यह संशोधन लाने का प्रस्ताव करता हूँ।