132 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
यथा संशोधित खंड विधेयक में जोड़ा गया।
खंड 21
(‘अर्हता तारीख’ और ‘अर्हता अवधि’ का अर्थ)
ऽडॉ. अम्बेडकरः मैं प्रस्ताव पेश करने की इजाजत चाहता हूँः
उपखंड (क) के स्थान पर निम्नलिखित रखेंः
(क) इस अधिनियम के अधीन पहले तैयार की गई निर्वाचक नामावलियों के विषय में क्रमशः 1 मार्च, 1950 तथा 1 अप्रैल, 1947 से प्रारम्भ होकर 31 दिसंबर, 1949 को समाप्त होने वाली अवधि होगी_ औरय्
यह उस करार का परिणाम है जो आज प्रातः निर्वाचक नामावलियाँ तैयार करने और अर्हता अवधि के संबंध में किया गया था।
खंड 27
ऽऽडॉ अम्बेडकरः श्रीमन्, मैं समझता था कि आज प्रातः मैंने माननीय सदस्य को स्पष्टीकरण दे दिया था जिन्होंने यह वाद-विवाद प्रारम्भ किया था कि खंड 17 क्यों लागू नहीं किया गया था किन्तु वे बहुत इच्छुक थे उनकी आपत्तियां संपूर्ण सदन द्वारा सुनी जाएँ। मैं उन्हें इस विशेषधिकार से वंचित नहीं करूँगा।
श्री एथिराजुलु नायडूः श्रीमन्, व्यवस्था की दृष्टि से, क्या यह उपयुक्त है कि इसका उल्लेख किया जाए कि प्रातः की बैठक में क्या हुआ था?
डॉ. अम्बेडकरः निश्चित रूप से_ इस संबंध में कुछ गोपनीय नहीं है। समिति का गठन स्वयं अध्यक्ष महोदय ने किया था।
माननीय अध्यक्षः इसमें कुछ भी गोपनीय नहीं है। यह उचित है।
डॉ. अम्बेडकरः श्रीमन्, अब बिन्दु यह है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमने विधेयक के खंड 17 में एक बहुत महत्वपूर्ण सिद्धांत की पहल की है, अर्थात् एक व्यक्ति एक ही निर्वाचन-क्षेत्र में रजिस्ट्रीकृत होगा और उसका एक मत होगा किन्तु यह सदैव ध्यान में रखा जाना चाहिए कि यह सिद्धांत उसी वर्ग के निर्वाचन-क्षेत्रों के मामले में लागू होगा, अर्थात् प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों में। इस विधेयक के खंड 27 के अधीन अब हम जो निर्वाचन-क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव पेश कर रहे हैं, वे निर्वाचन-क्षेत्रों के भिन्न
ऽसं. वा., खंड 4, भाग II, 20 अप्रैल, 1950, पृष्ठ 3082
ऽऽसं. वा., खंड 4, भाग II, 20 अप्रैल, 1950, पृष्ठ 3084-87