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वर्ग हैं। वे उसी वर्ग के निर्वाचन-क्षेत्र नहीं हैं। स्नातक निर्वाचन-क्षेत्र एक अलग वर्ग का निर्वाचन-क्षेत्र है। शिक्षक निर्वाचन-क्षेत्र एक अलग वर्ग का निर्वाचन-क्षेत्र है। इसी प्रकार स्थानीय प्राधिकरणों का निर्वाचन-क्षेत्र एक अलग वर्ग का निर्वाचन-क्षेत्र है। परिण् ामस्वरूप, इसमें कोई बहुत बड़ी अनियमितता प्रतीत नहीं होगी, यदि किसी व्यक्ति का नाम निर्वाचन-क्षेत्र के विभिन्न वर्गों की निर्वाचक नामावलियों में सम्मिलित हो जाए। इसके अतिरिक्त वास्तव में, मैं यह कहने के लिए आबद्ध हूँः मैं नहीं समझ सकता कि उच्च सदन के गठन पर संसद सदस्य इतने उद्विग्न क्यों हैं।
5.00 बजे अपराह्न
यह पूर्ण रूप से एक प्रभावित निकाय हैµअलंकारात्मक निकाय भी नहीं। इसे कोई शक्ति प्राप्त नहीं हैµपुनरीक्षण की भी नहीं। यह ऐसा निकाय नहीं है जिसे निचले सदन के साथ समानाधिकार प्राप्त हो। कुछ प्रांतों ने उनके लिए इच्छा व्यक्त की थी। संभवतः वे यह समझ रहे होंगे कि उनका दूसरा सदन लगभग यहाँ के सदन के ही पैटर्न पर होगा जो, यदि वित्तीय विधान को नहीं, तो भी कम से कम सामान्य विधान रोक कर रख सकेगा। किन्तु उसे यह शक्ति भी नहीं दी गई है और मेरी समझ में यह बात नहीं आती कि संसद सदस्य, भले ही मात्र कुछ सैद्धांतिक मूलतत्वों को बनाए रखने के लिए ही, एक संविधानिक निकाय के लिए क्यों चिंताग्रस्त रहे हैं जिसका मेरे अनुसार, कोई मूल्य और महत्व नहीं है।
खंड 27 विधेयक में जोड़ा गया।
खंड 28 और 29
डॉ. अम्बेडकरः मैंने अपने मित्र पंडित ठाकुर दास भार्गव को आश्वासन दिया था कि मैं उस बिन्दु पर अपना बयान दूंगा जिसमें उन्हें दिलचस्पी है और अब मैं यह कथन करता हूँ कि हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक सावधानी बरतेंगे कि विद्यमान निर्वाचक नामावलियाँ पुनरीक्षित की जाएँ तथा इनमें आवश्यक लोप या परिवर्धन किए जाएँ।
खंड 28, 29 विधेयक में जोड़े गए।
नया खंड 30
डॉ. अम्बेडकरः मैं प्रस्ताव पेश करने की इजाजत चाहता हूँः
खंड 29 के पश्चात् निम्नलिखित जोड़ेंः
फ्30 सिविल न्यायालयों की अधिकारिता वर्जितµकिसी भी सिविल न्यायालय को अधिकारिता नहीं होगीµ