17. दंत चिकित्सक (संशोधन) विधेयक - Page 161

146 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अतः यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा मौजूदा खंड में समुचित रूप से शामिल है।

श्री कामथः मेरा मुद्दा यह था कि यदि मार्च, 29 से मई, 29 तक इन दो महीनों के दौरान किसी दंत चिकित्सक का नाम इस रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया है, तो इस अधिनियम के अधीन, और चूंकि यह अध्यादेश लागू नहीं हुआ था, सरकार के मात्र कार्यपालक अनुदेश से अभियोजन को, अथवा दंत चिकित्सक पर अधिरोपित की जा रही किसी अन्य शास्ति को कैसे रोका जा सकता था?

डॉ. अम्बेडकरः मैं पूरी तरह सहमत हूँ कि इससे अभियोजन रुक नहीं सकता। किन्तु भाग्यवश ऐसा कोई मामला नहीं घटा है और अब यह घट भी नहीं सकता, क्योंकि वह अवधि वापस मूल अधिनियम तक चली गई है।

श्री कामथः किन्तु तब महोदय...........

माननीय अध्यक्षः आर्डर आर्डर। अब यह मुद्दा बहुत स्पष्ट है।

डॉ. अम्बेडकरः मेरे मित्र श्री कामथ ने इस विधेयक को सदन में लाने के कारण् ों पर विचार करते हुए, यदि मुझे ऐसा कहने की अनुमति है तो कुछ काफी गंभीर आरोप लगाए हैं। सरकार की ओर से दलील दी गई है कि यह विधेयक लाना इसलिए आवश्यक हो गया कि ऐसे राज्य, जिनसे सूची तैयार करने संबंधी उपबंधों को कार्यान्वित करना अपेक्षित था, अब तक भी कार्य नहीं कर सके हैं। मेरे मित्र का सुझाव है कि इसके पीछे एक और कारण भी है और वह कारण यह है कि इस देश में कुछ ब्रिटिश दंत चिकित्सक भी कार्य कर रहे हैं जो स्वयं को अधिवासी नहीं बनाना चाहते हैं, और स्वयं को पंजीकृत कराना नहीं चाहते हैं। तथा यह विधेयक उन्हें लाभ देने के आशय से बनाया गया है। अब, यह बात मेरी समझ से बाहर है कि एक ब्रिटिश दंत चिकित्सक को जिसका इस देश में अधिवासी बनने का कोई इरादा नहीं है, इस समयावधि में एक वर्ष के विस्तार से कैसे लाभ पहुँचेगा। मैं यह समझ नहीं सकता। किन्तु यदि मेरे मित्र अपने इस सुझाव पर अड़े रहते हैं, जो कि सरकार के एक माननीय सदस्य पर बहुत ही गंभीर अभिकथन है, तब, उनका यह कर्तव्य होना चाहिए कि जब वे सदस्य वापस आएं तो उनके सामने यह प्रश्न रखा जाए, और उनसे उत्तर माँगा जाए कि क्या इस विशेष विधेयक को प्रस्तुत करने के पीछे यही वास्तविक उद्देश्य था। मैं कोई भी स्पष्ट उत्तर नहीं दे सकता, किन्तु मैं इतना अवश्य कहूंगा कि मुझे इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा है कि सरकार का एक माननीय सदस्य ऐसा विधेयक प्रस्तुत करने का साहस करेगा जिसका उद्देश्य और कुछ न होकर मात्र इतना होगा कि इस देश में एक अथवा दो यूरोपीय दंत चिकित्सकों को लाभ पहुंचाया जाए। मुझे यह अभिकथन अत्यंत बेतुका लगता है।