147
श्री कामथः मैंने यह नहीं कहा कि यही एक मात्र प्रयोजन है, यह भी एक प्रयोजन हो सकता है।
अध्यक्षः किन्तु अब भी, यह सुझाव अत्यंत अहितकर है।
डॉ. अम्बेडकरः उस मुद्दे पर भी मैं उनका ध्यान उनके द्वारा पूछे गए इस प्रश्न के कि ऐसे सभी राज्यों की वर्तमान स्थिति क्या है, जिन्हें यह बताने के लिए लिखा गया था कि उन्हें यह रजिस्टर तैयार करने में कितना समय लगेगा, उत्तर की ओर दिलाना चाहूँगा। राज्यों ने उत्तर दिया है कि उन्हें इस काम को करने में कम से कम एक वर्ष का समय लगेगा। और बम्बई सरकार ने भी जिसके बारे में यह कहा जा सकता है कि वहां प्रशासनिक तंत्र अन्य राज्यों की तुलना में अधिक दक्ष है, जोर दिया है कि इस काम के लिए उन्हें दो वर्ष दिए जाने चाहिएं। मेरे ख्याल से मेरे मित्र श्री कामथ के इस सुझाव को कि यह विधेयक इस देश के कुछ ब्रिटिशरों को संरक्षण प्रदान करने के लिए बनाया गया है। निरस्त करने के लिए इतना ही काफी होगा।
मैं नहीं समझता कि कोई ऐसा मुद्दा बचा है जो उठाया गया हो और अपना उत्तर देते समय मैंने जिसके बारे में उल्लेख न किया हो। यह अत्यन्त साधारण, निर्विवाद विधेयक है। यह केन्द्रीय सरकार की गलती के कारण नहीं लाया गया है अपितु प्रांतीय सरकारों द्वारा वहन किए गए अन्य बोझों के कारण पैदा हुआ है कि वे इस अधिनियम के एक विशेष उपबंध को लागू करने के लिए समय नहीं निकाल सके। मैं नहीं समझता कि हम इसके सिवाय और कुछ कर सकते हैं कि कानून के इस अंश को प्रभावी बनाने के लिए प्रांतीय सरकारों की सहायता करें और दंत चिकित्सक अधिनियम को यथासंभव शीघ्र लागू करें।
माननीय अध्यक्षः प्रश्न है किः
फ्दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 का संशोधन करने के इस विधेयक पर विचार किया जाए।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
इस विधेयक में खंड 2 जोड़ा गया।
खंड 3 (1948 के अंधिनियम XVI की धारा 46 और धारा 49 का संशोधन)
श्री कामथः मैं यह प्रस्ताव पेश करने की अनुमति चाहता हूँः
फ्दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 की धारा 46 की उप-धारा (3) और धारा 49 की उप-धारा (1) के प्रस्ताविक संशोधन में, खंड 3 में, ‘तीन वर्ष’ के स्थान पर पर ‘2 वर्ष और 6 माह’ रखा जाए।य्
वर्तमान खंड को इसलिए जोड़ा गया है ताकि राज्य सरकारें इस अधिनियम की धारा 46 और 49 के अधीन दंत चिकित्सकों संबंधी अपना रजिस्टर पूरा कर सकें। यह विधान