148 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
भूतलक्षी है। ऐसी अवस्था में इस खंड में प्रयुक्त शब्द है फ्और इन्हें हमेशा प्रतिस्थापित हुआ समझा जाएगा।य् एक बात मेरी समझ से बाहर है कि कुछ सौ दंत चिकित्सकों के नाम इस रजिस्टर में दर्ज करने के लिए इतने अधिक समय की क्यों आवश्यकता है। मुझे यह ज्ञात नहीं है कि सब राज्यों में कितने दंतचिकित्सक हैं..........।
डॉ. अम्बेडकरः यह राय का विषय है। मेरे मित्र श्री कामथ, जिनमें अत्यधिक ऊर्जा है और जिनका प्रशासनिक अनुभव भी काफी है, निस्संदेह यह सोचते हैं कि इस रजिस्टर को पूरा करने के लिए 6 माह काफी होंगे। जैसा कि मैंने सदन को अभी बताया है कि बम्बई जैसी दक्ष सरकार ने भी दंत चिकित्सकों का नाम रजिस्टर में दर्ज करने के लिए दो वर्ष की माँग की है। मैं व्यक्तिगत तौर पर यह सोचता हूँ कि यह रजिस्टर तैयार करने का दायित्व प्रांतीय सरकारों का है और इस तथ्य के मद्देनहर यह वांछनीय है कि इस सदन को उस चीज़ का अनुसरण करना चाहिए जो इस मामले पर प्रांतीय सरकारें व्यवहार्य समझती हैं। वस्तुतः हमने दो वर्ष, जैसा कि बम्बई सरकार ने माँग की थी, के स्थान पर इस अवधि को घटाकर एक वर्ष कर दिया है। हम एक वर्ष की अवधि के पक्ष में हैं जो मद्रास सरकार का मूल प्रस्ताव था। मैं नहीं समझता कि इस विधेयक में दी गई अवधि को कम करना हमारे लिए सुरक्षा के साथ संभव है।
श्री कामथः मैं यह मान लेता हूँ कि माननीय मंत्री के पास आंकड़े नहीं हैं।
डॉ. अम्बेडकरः कोई आंकड़े नहीं हैं।
माननीय अध्यक्षः यदि रजिस्टर पूरे नहीं हैं, तो वे सही आंकड़े कैसे दे सकते हैं?
डॉ. अम्बेडकरः इस संबंध में कोई रजिस्टर नहीं है और किसको पता है कि कौन दंत चिकित्सक है अथवा कौन नहीं?
माननीय अध्यक्षः प्रश्न है
फ्कि दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 की धारा 46 की उप-धारा (3) और धारा 49 की उप-धारा (1) के प्रस्ताविक संशोधन में, खंड 3 में फ्तीन वर्षय् के स्थान पर फ्दो वर्ष और छह माहय् रख दिया जाए।य्
प्रस्ताव अस्वीकृत कर दिया गया।
ऽडॉ. अम्बेडकरः जैसाकि मेरे मित्र श्री सिधवा ने कहा है कि यह संशोधन एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को प्रभावित करता है, जो इस खंड के उपबंधों में अन्तर्निहित है, अर्थात् रजिस्टर संपूर्ण भारत में एक ही दिन प्रभावी होना चाहिए। यह मात्र शैक्षणिक रुचि का विषय नहीं है..............
ऽसं. वा., खंड 4, भाग II, 11 अगस्त, 1950, पृष्ठ 863-64