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श्री सिधवाः क्या यह अधिनियम में निर्धारित किया गया है?
डॉ. अम्बेडकरः तभी हमने शुरू से अब तक तीन अथवा दो वर्ष ही कहा है। अन्यथा हम भिन्न राज्यों के लिए भिन्न तारीखें निर्धारित करते। एकरूपता के सिद्धांत को बनाए रखना आवश्यक और वांछनीय है। सदन देखेगा कि यह पदधारण करने की पात्रता को कैसे प्रभावित करता है। यह नहीं कहा जा सकता कि एक व्यक्ति एक विशेष राज्य में पदधारण के लिए पात्र है तथा दूसरे राज्य में नहीं, केवल इसलिए कि वह राज्य यह रजिस्टर तैयार कर सका है। अतः मैं सोचता हूँ कि चूँकि सिद्धांत को बनाए रखना वांछनीय है अतः मैं श्री सिधवा के संशोधन को स्वीकार नहीं कर सकता। आखिरकार अंतर केवल छह माह का है।
श्री सिधवाः मैं अपना संशोधन वापस लेने की अनुमति चाहूँगा।
संशोधन, अनुमति से, वापस लिया गया।
माननीय अध्यक्षः प्रश्न है किः
फ्खंड 3 इस विधेयक का अंश है।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
खंड 3 इस विधेयक में जोड़ा गया।
ऽधारा 4 (1948 के अधिनियम XVI , अनुसूची का संशोधन)
(माननीय उपाध्यक्ष पीठासीन)
श्री त्यागी (उत्तर प्रदेश)ः मेरा संशोधन इस प्रकार हैः
दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 की अनुसूची के भाग I की प्रस्तावित मद (2ए) के स्थान पर, खंड 4 में निम्नलिखित मद रखी जाएः
फ्(2) कोई अन्य संस्थान जो दंत चिकित्सा में शिक्षा अथवा व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहा है, जिसे केन्द्रीय सरकार केन्द्रीय दंत चिकित्सक परिषद से परामर्श करके इस प्रयोजन के लिए और ऐसी शर्तों पर जो सरकार इसके लिए ठीक समझे, मान्यता प्रदान कर सकेगी।य्
मैं यह स्वीकार करना चाहूँगा कि डॉ. अम्बेडकर दृढ़ निश्चय हैं........। मैं संस्थान की निंदा नहीं करना चाहता। मैं यह नहीं जानता कि इसका स्तर कैसा है, मुझे व्यक्तिगत तौर पर इसकी कोई जानकारी नहीं है। अतः मैं इस संस्थान की प्रतिष्ठा को हानि नहीं पहुंचाना चाहता। किन्तु चूंकि जाँच चल रही है, बजाए इसके कि सारी संसद को इस संस्थान को मान्यता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध किया जाए कि सरकार यह विनिश्चय करने का अधिकार अपने हाथों में रखे......।
ऽसं. वा., खंड 5, भाग II 11 अगस्त, 1950, पृष्ठ 864-65