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श्री एम.ए. आय्यंगरः आप इसमें एक अनुसूची जोड़ सकते थे।
डॉ. अम्बेडकरः यह भी किया जा सकता था। ऐसा करने के अनेक तरीके हैं। मैं इस बात से इनकार नहीं करता कि कुछ मामलों में कुछ तरीके अन्य से बेहतर हो सकते हैं, किन्तु जहाँ तक इस विधेयक में शामिल साधारण सिद्धांत का संबंध है। मैं नहीं मानता कि इसमें कुछ भी प्रारूपकार की पद्धति के विरुद्ध अथवा सांविधानिक है। मेरे मित्र देखेंगे कि मैंने उदाहरणार्थ मौजूदा सत्र में एक विधेयक पारित किया है जिसका नाम है ‘भाग ‘ख’ राज्य विधेयक’, जिसके साथ एक समय-सारणी संलग्न है। इसमें अधिनियम से संबंधित सभी सामग्री उपलब्ध है। कारण यह है कि, जब मामला उठाया जाएगा तभी मैं स्पष्ट करूँगा, कि कुछ विधियाँ बिना कुछ अनुकूलन किए लागू नहीं की जा सकतीं। अतः इस आश्य से समय-सारणी समाविष्ट की जानी थी कि इस अनुकूलन के कारण यह विधि लागू हो जाएगी। कूच-बिहार जैसे कुछ अन्य ऐसे भी हैं जहाँ कोई समय-सारणी नहीं है, क्योंकि यहाँ अनुकूलन अपेक्षाओं की आवश्यकता नहीं होती। अतः हमारे पास एक साधारण खंड है और मैं नहीं समझता कि मेरे माननीय मित्र के विधेयक में अंतर्विष्ट उप-खंड में कुछ भी सांविधानिक अथवा अनुचित है।
ऽमाननीय अध्यक्षः जैसा कि मैंने बताया मैं कल सदन में मौजूद नहीं था, किन्तु मैंने सदन की कार्यवाही पढ़ी थी। क्या माननीय विधि मंत्री इससे आगे कुछ और कहना चाहते हैं? मैं नहीं समझता कि अब यह आवश्यक है।
डॉ. अम्बेडकरः महोदय, मैंने स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी है।
माननीय अध्यक्षः तब मैं संशोधन को सदन के समक्ष रखूंगा।
प्रश्न है किः
फ्निष्क्रांत सम्पत्ति प्रशासन अधिनियम, 1950 की प्रस्तावित धारा 58 की उप-धारा (2) में, खंड 2 में फ्इस अधिनियम के समनुरूपय् शब्दों के स्थान पर कोष्ठक तथा अंक रखे जाएं जो इस अधिनियम के समनुरूप हों और जिसका उप-धारा (1) द्वारा निरसन नहीं किया जाता हो।य्
प्रस्ताव अंगीकार किया गया।
ऽसं. वा., खंड 6, भाग II, 21 नवंबर, 1950, पृष्ठ 342-43