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प्रतिरोध हैं, किन्तु मुझे पूरा विश्वास है कि इस सदन के किसी भी कार्य में कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह पर ध्यान नहीं देगा। अतः मैं आशा करता हूँ कि उनके संकल्प का विरोध करने पर वे अपने दिल में इस प्रकार के विचार नहीं आने देंगे।
महोदय, मैं नहीं समझता कि समिति बनाने से कोई हल निकलेगा क्योंकि इस बहस के फलस्वरूप कोई व्यवहार्य बात सामने नहीं आईं। यदि इस बहस के फलस्वरूप कोई ठोस सुझाव सामने आते जिस पर कोई कानून बनाना संभव होता तो मैं उस सिफारिश को स्वीकार करने में किंचित भी नहीं हिचकता। मेरे मित्र प्रो. के.टी. शाह ने कहा है कि वे इसके लिए फार्मूला तलाशने में इस प्रक्रम पर निराश नहीं हुए, जिससे वे इसे विधि का रूप दे सकते। मैं उनसे और अधिक ठोस सुझाव तथा कोई तरीका जानना चाह रहा हूँ जिससे वे इसे विधि का रूप प्रदान करेंगे, किन्तु उन्होंने अचानक यह कहकर अपनी बात समाप्त कर दी कि वे इसके लिए निराश नहीं हैं, और उन्होंने इस पर भी कोई प्रकाश नहीं डाला कि इस मामले से कैसे निपटा जाए। वास्तव में मैं जानता हूँ कि मैं जब इस प्रस्ताव को लोक प्रतिनिधित्व विधेयक के विचार के इस सत्र में रखूंगा तो इस पर वाद-विवाद होगा, क्योंकि अहिताएँ तथा निरर्हताएँ नामक यह विषय यहां सदन के समक्ष विशेष रूप से रखा जा रहा है। और चाहे मेरे मित्र डॉ. पंजाब राव देशमुख की कोई भी इच्छा हो, जब यह विधेयक पेश होगा तो संशोधन के रूप में इस प्रश्न को पुनः उठाने की इस सदन की स्वतंत्रता को कोई नहीं छीन सकता। इस समय मैं इस संकल्प को स्वीकार नहीं कर सकता।
माननीय अध्यक्षः मैं सदन के समक्ष मात्र संशोधन प्रस्तुत कर रहा था।
श्री कामथ (मध्य प्रदेश)ः महोदय, चूंकि यह प्रश्न सदन में इस सत्र के अन्त में आ रहा है, इसलिए मैं आपकी अनुमति से अपना संशोधन वापस लेता हूँ।
यह संशोधन, अनुमति से, वापिस लिया गया।
माननीय अध्यक्षः तत्पश्चात् श्री एस.एन. मिश्रा द्वारा पेश किया गया संशोधन है। प्रश्न हैः
फ्कि फ्अहिताएँय् शब्द से पूर्व फ्न्यूनतम शैक्षणिकय् शब्द भी जोड़े जाएँ।य्
प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया गया।
माननीय अध्यक्षः अब जहां तक इस प्रस्ताव का संबंध है, प्रश्न हैः
फ्कि इस सदन की भी यही राय है कि भारत की संसद तथा राज्यों के विधानमंडल की सदस्यता के लिए अहिताएँ निर्धारित की जाएँ और अगले चुनाव आने से पूर्व इन्हें कार्यरूप देने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएं।य्
प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया गया।